Category: चिराग़ जैन

संबन्धों की परिभाषा

लोग बांधना चाहते हैं सम्बन्धों को परिभाषा में कैसे व्यक्त करूँ मैं मन की अनुभूति को भाषा में क्या बतलाऊँ मीरा संग मुरारी का क्या नाता है शबरी के …

भारती आज तेरे ज़ख्म कौन धोएगा

भारती आज तेरे ज़ख्म कौन धोएगा तेरे बँटते हुए आँचल में कौन सोएगा बम्बई ने जो धमाकों के ज़ख्म खाए हैं भूखे बच्चे जो गोधरा में बिलबिलाए हैं मंदिरों …

चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं

चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं नेकियाँ ख़ुदगर्ज़ियों के पास आकर मर गईं जिनके दम पर ज़िन्दगी जीते रहे हम उम्र भर अंत में वो ख्वाहिशें भी …

गुड्डी

गुड्डी के पापा लन्च में टिफ़िन खोलते समय मूंद लेते हैं आँखों को क्योंकि देख नहीं पाते हैं रोटियों से झाँकते तवे के सुराखों को। ईमानदार क्लर्क समझ नहीं …

कविता

ज्वार भावनाओं का जो मन में उमड़ता है तब आखरों का रूप धरती है कविता आस-पास घट रहे हादसों की कीचड़ में कुमुदिनी बन के उभरती है कविता प्रेयसी …

अनपढ़ माँ

चूल्हे-चौके में व्यस्त और पाठशाला से दूर रही माँ नहीं बता सकती कि ”नौ-बाई-चार” की कितनी ईंटें लगेंगी दस फीट ऊँची दीवार में …लेकिन अच्छी तरह जानती है कि …