Category: चरणदास

साधौ जो पकरी सो पकरी

साधौ जो पकरी सो पकरी। अबतो टेक गही सुमिरन की, ज्यों हारिल की लकरी॥ ज्यों सूरा ने सस्तर लीन्हों, ज्यों बनिए ने तखरी। ज्यों सतवंती लियो सिंधौरा, तार गह्यो …

साधो निंदक मित्र हमारा

साधो निंदक मित्र हमारा। निंदक को निकटै ही राखूं होन न दें नियारा। पाछे निंदा करि अघ धोवै, सुनि मन मिटै बिकारा। जैसे सोना तापि अगिन मैं, निरमल करै …

साखी

सतगुरु से मांगूं यही, मोहि गरीबी देहु। दूर बडप्पन कीजिए, नान्हा ही कर लेहु॥ बचन लगा गुरुदेव का, छुटे राज के ताज। हीरा मोती नारि सुत सजन गेह गज …