Category: चन्द्र मोहन किस्कु

खुशहाली की आशा

खुशहाली की आशा ———————- वह दिन कब आएगा ? जब सामने जो दिख रहा गगनचुम्बी ऊँची अट्टालिका के निचे ,पुआल की छज्जा पुआल की झोपडी में सोहराय महीना की …

आशा की प्रदीप

आशा की प्रदीप —————— १ अंधकार की आँचल छोड़कर मैं सूर्यदेव की ओर बढूँगा दुःख और पराजय की पथ पर प्रदीप बहुत सारा जलाऊँगा। २ बुझती ख्वाहिश की डगर …

swantrataa ki swatantrataa diwas palan

स्वतंत्रता की स्वतंत्रता दिवस पालन प्रतिदिन ही स्वतंत्रता की माँ को पथ में ,पगडंडियों में सड़क की चौराहों पर लोगों की ओर करुण दृष्टि डालते हुए भीख मांगते हुए …

भोको की माँ

पेड़-लत्ताओं की कच्ची हरी पत्ती सफेद होकर गिरे जाती है फिर से नयी हरियाली पेड़ों में छा जाती हैं सूर्य की प्रकोप से सुखी बुढ़ी धरती भी वर्षा की …

मैं तो उड़ुँगा

मैं, क्यों चलुँगा? नहीं, मैं तो उड़ुँगा पंख फैलाकर उड़कर जाऊँगा नीले आसमान की उस पार जाँहा तारे -सितारे रहते हैं और तारों -सितारों को तोड़कर आँचल से बाँधकर …

मैं जिन्दा रहुँगी

मैं जिन्दा रहुँगी तुम्हारे आँखों के दोनो कोनों में दया -दर्द की आँसू बनकर. मैं जिन्दा रहुँगी तुम्हारी बन्द मुट्ठी मे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई मे सहयोग देकर. मै …

प्यार की पताका

गुलाबी रंग से होंठ लाल कर जब तुम मुड़कर मुस्कराती हो फूलों की सुगंध मेरी ह्रदय मे उतर जाती है काली मेघा जैसी खुली केश, जब हवा से हिलती …