Category: चंद्र कुमार जैन

छोटी-सी बात पर

सेचता हूँ लिखूं एक गीत किसी छोटी सी बात पर ! सुना है बड़ी-बड़ी बातों पर लिखे गये हैं बड़े-बड़े गीत परन्तु छोटी बात, क्या वास्तव में छोटी होती है ? …

सच्चा संत

संत किसी अंत से नहीं डरता कठिनाइयॉ उसकी पगडंडियँ हैं उपसर्ग उसे पथ बताते हैं वन, उपवन, उद्यानों का सौंदर्य उसे रिझाता नहीं स्वर्ग का सुख वैभव भी उसे …

आलोकित कल होगा

जीवनदान करें, बेला है बलिदानों की आज ! प्रात: से रवि टेर रहा है ललित प्रभा का बीज उगाओ धरती के कोने-कोने में मानवता का अलख जगाओ त्याग, दया, करूणा …

मुक्ति के लिए कविता

शब्दों की अर्थवत्ता को तोड़ने और व्यर्थ अर्थों की सत्ता को छोड़ने के बाद जो रची जाएगी वही होगी जागरण की कविता ! करेगी संघर्श वह दिन – प्रतिदिन सीमित …

पतझर का झरना देखो तुम

मधु-मादक रंगों ने बरबस, इस तन का श्रृंगार किया है ! रंग उसी के हिस्से आया, जिसने मन से प्यार किया है ! वासंती उल्लास को केवल, फागुन का अनुराग न …