Category: चंद्रकांत सारस्वत

मैं चला जाऊंगा, छोड़कर ये दुनिया – (चंद्रकांत सारस्वत)

मैं चला जाऊंगा मैं चला जाऊंगा, छोड़कर ये दुनिया मुझको पता है तू आयेगी, ‘मौत’ मुझको पता है तू ज़रूर आयेगी, मैं मना नहीं कर पाऊंगा, रोक नहीं पाऊंगा …

रहम कर कुछ तो अब तू ज़िन्दगी (चंद्रकांत सारस्वत)

रहम कर कुछ तो ज़िन्दगी जब वो नहीं है तो क्यू खामखा मुझको, उसके खवाबों और यादों से सताती है, तू तो चैन से सो जाती है, हमको फिर …

मैं डरता हूं (लेखक- चंद्रकांत सारस्वत)

जिसको कभी पाया नहीं ना जानें क्यों उसको खो देने से डरता हूं उसके बारें में कुछ कहने से भी डरता हूं सुनने से भी डरता हूं मैं उसको …

यही तो जीवन है (लेखक- चंद्रकांत सारस्वत )

यही तो जीवन है, इसको समझना पड़ता है कहीं सब कुछ मिल जाता है, कहीं अभाव में कोई मर जाता है, पल में पत्थरों में भी उभर आता है, …

ज़िंदगी, एक चलचित्र

ज़िंदगी, एक चलचित्र जहाँ हर कोई अदाकार निभा रहा है अपना किरदार कभी मिलती तालिया तो कभी बस तिरस्कार रोते हुए से हँसना, पल भर में रोना, अपनी पटकथा …

मेरे ख़त का जवाब नहीं आया

मेरे ख़त का जवाब नहीं आया बाल सफ़ेद हो गये, उम्र खर्च हो गयी पर मेरे सवालों का जवाब नहीं आया आज तो तेरी-मेरी मोहब्बत के निशान भी मिट …