Category: छगनलाल सोनी

आश्चर्य

भीष्म नहीं चाहते थे परिवार का बिखराव कृष्ण नहीं चाहते थे एक युग की समप्ति धृतराष्ट्र नहीं चाहते थे राज-पतन द्रौपदी नहीं चाहती थी- चीर हरण। इसके बावजूद वह …

माँ

माँ तुम्हें पढ़कर तुम्हारी उँगली की धर कलम गढ़ना चाहता हूँ तुम सी ही कोई कृति तुम्हारे हृदय के विराट विस्तार में पसरकर सोचता हूँ मैं और खो जाता …