Category: बिपिन कुमार झा

कैसे…?

माना सभी हैं यहां अकेले, पर सृष्टिचक्र को कैसे भुलायें? कैसे कह दें मैं नवसृष्टि का प्राणी, नवजीवन है इस वसुधा पर। कैसे कह् दें “कोइ नहीं मेरा”? जो …

प्रलय

क्या तुमनें देखा है प्रलय का मंजर ? निस्तब्ध जगत दुःखद करुण क्रंदन, रंग बिरंगे इस दुनियां में शून्य सा स्पंदन, झंझवातें वो सर्वत्र कम्पन, रग रग में टूटता …

सोचा मैं भी जन्मदिवस मनाऊं||

आश्विन कृष्ण त्रयोदशी के दिन नवरात्रा से तीन दिवस पहले | श्वेत धवल वस्त्रयुत हो सोचा मैं भी जन्मदिवस मनाऊं|| मित्र किसी ने पूछा मुझसे दिवस तो ऐसा हो …

हमनें भी कुछ सीखा जीवन से॥

हमनें भी कुछ सीखा जीवन से पाकर कुछ यूं छटा निराली। स्वप्निल से इस महफिल से हमनें भी कुछ सीखा जीवन से॥ दृष्टि सुजन की पाकर आजीवन बने रहे …

सहजानुभूति मैने पयी है।

सहजानुभूति मैने पयी है। स्नेह सदा ही बुरी बला, है स्नेह सदा ये कहती थी। फिर भी उसके बन्ध पाश में, सहजानुभूति मैने पयी है। दुर्दिन दुर्गति में व्यक्त …

प्रणय की तुम बात न करना प्रेयसी ।

प्रणय की तुम बात न करना प्रेयसी । दुनियाँ निष्ठुर दिल है कोमल , मर्दित करते हैं ये जैसे मदगज उत्पल, नहीं कभी तुम मुझे याद आना नहीं कभी …

बचपन था वो कितना सुहाना!!

बचपन था वो कितना सुहाना!! संग तेरे बठे बात लडाना। भाई-बहन को खूब चिढाना काम न करना कर लाख बहाना उम्र बढी खाकर पुरबाई मेरे मन ने ली अँगराई …

काश! कि हम पत्थर दिल होते!!

काश! कि हम पत्थर दिल होते!! काश! कि हम पत्थर दिल होते!! खूब सताते लोगों को नहीं किसी से चाहत होती नहीं किसी होती नफरत। सबसे झूठा प्यार जताते …

कैसे मन का दीप जलाऊँ?

इन अन्धेरी रातों में कैसे मन का दीप जलाऊँ? अंजान शहर की इन राहों में किसको अपना गीत सुनाऊँ? जहाँ न कोई रिश्ता नाता फिर क्यूं मन है वहीं …

भावुकता को मिटाना है॥

भावनाओं के तूफानों नें जाने कितने चमन उजाडे झंझाबातों को ये लाकर कितनी बनती बात बिगाडे मैनें अब यह जान लिया अब खुद को है पहचान लिया भावुकता के …

शायद सुबह अब हो गयी।

ताड के झुडमुट से दिखती स्वर्णिम आभाएं बादलों में प्रतिबिम्बित ये स्वर्णिम छटाएं कहते हैं उदीचि में मूक बनकर शायद सुबह अब हो गयी। पंछी के कलरव, मोटर की …