Category: भूपेंद्र कुमार दवे

ऐ खुदा मुझे दवा और दुआ कुछ न दे

ऐ खुदा मुझे दवा और दुआ कुछ न दे दे सके तो अपनी मुस्कान की कतरन दे। इक बहाना चाहिये था मंदिर आने का शुक्र है तूने दर्द दिया …

मुझे देखकर तुम (युगल गीत)   … भूपेन्द्र कुमार दवे

मुझे देखकर तुम (युगल गीत)   गायक “मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी हो मोहब्बत के गजरे सजाती मिली हो।“ गायिका “मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे हो शरारत के जल्वे …

कदम दो कदम इक साथ चलो तो बेहतर है

कदम दो कदम इक साथ चलो तो बेहतर है मधुर मीठी बातें भी करो तो बेहतर है।   खोजने सकून चले हो अँधरी बस्ती में चिराग जलाकर साथ रखो …

पीड़ा के पलने पर पलता … भूपेन्द्र कुमार दवे

पीड़ा के पलने पर पलता प्यार नहीं था पछताता। आँसू भी आँखों में आकर नहीं सिसकने अकुलाता।   मुस्कानें मुस्काती दिखती जब मिलती थीं मुस्कानों से यादों की झुरमुट …

मेरे गीत नीलाम हो गये —- भूपेन्द्र कुमार दवे

मेरे गीत नीलाम हो गये अमोल बोल बदनाम हो गये दुल्हन-सी कुँवारी लय थी सुमधुर वह श्रंगार किये थी सजी सजायी शब्द पालकी भावी सुख का संसार लिये थी …

गाओ फिर गीत वही …. भूपेन्द्र कुमार दवे

गाओ फिर गीत वही गाओ फिर गीत वही जो उस दिन गाया था मेघों की पलकों जो भादों भर लाया था मेरे मन को बहलाने की घावों को भी …

उन गीतों को तुम सुर तो दे दो …. भूपेन्द्र कुमार दवे

उन गीतों को तुम सुर तो दे दो    जो रुँधे कंठ में मूक पड़े हों उन गीतों को तुम सुर तो दे दो।   जो उलझे वीणा तारों …

सन्नाटे में छिप जाती है … भूपेन्द्र कुमार दवे

 सन्नाटे में छिप जाती है हर पीड़ा की आवाज कहीं। इसको सुनने जो कतराते उनको होती है लाज नहीं।   इस कारण जब ठोकर खायी इस पीड़ा ने तब …

मेरे गीतों का परिचय —- भूपेंद्र कुमार दवे

मेरे गीतों का परिचय बहते आँसू देते हैं पलकों को उपहार स्वयं सहमे आँसू देते हैं   गीले गीले मोती दुख के पीड़ा की जब माला बनते गीतों में …

ऐसा लगता है जैसे मैंने कुछ जीना सीख लिया है

ऐसा लगता है जैसे मैंने कुछ जीना सीख लिया है जीवन की मधुप्याली में अब अमृत भरना सीख लिया है।   अपनी पीड़ा सहते सहते ऊब गया तो तब …

मेरा जीवन पूरा तूने

 मेरा  जीवन  पूरा  तूने   मेरे  पुण्य कर्म को  तूने पापों की श्रेणी में रखकर और मधुरवाणी को  मेरी कटुता का ही भेद बताकर   मेरा  जीवन  पूरा  तूने …

सूनी सूनी साँसों के सुर में

सूनी सूनी  साँसों के सुर में ये  आँसू कब तक  थिरकेंगे। कभी कहीं  ये आवाज थमेगी अब जग में ना आँसू बरसेंगे।   ये साँसें  हैं  दीप  सरीखी इक …

आस्मां ने अमावस में चाँद छिपाकर रखा है

आस्मां ने अमावस में चाँद छिपाकर रखा है रात ने भी पसंदीदा जेवर जुदाकर रखा है।   जुगनूओं की बारात भी चुपचाप चल रही है रात ने गहन सन्नाटा …

मेरे गीतों के आँचल में

मेरे गीतों के आँचल में नटखट सुर कुछ आ जाने दो लहरों का कंपन स्पंदन भी सागर में जा मिलने दो। हो प्रभात भी सुखकर ऐसा कलरव करते खगगण …

चलो, अब जिन्दगी को करीब से देखा जाये

चलो, अब जिन्दगी को करीब से देखा जाये गरीब की झोपड़ी में झाँक के देखा जाये यहीं पे ईश्वर और उसकी आस्था बसती है चलो, गरीब के आँसू तैर …

हे प्रभु, तुम मेरे गीत न गावो —- भूपेंद्र कुमार दवे

हे प्रभु, तुम मेरे गीत न गावो   है सन्नाटा चहूं और अब चुप चुप है कोलाहल भी सहमे सहमे वाद्यवृंद हैं टूट चुकी है पायल भी करुण स्वरों …

तुमको याद किया करता हूँ

मैं तुमको याद किया करता हूँ।।   जब सागर पर किश्ती होती ऊँची  ऊँची  लहरें  उठती और  दूर से  आँधी आकर उसे निगलने  खूब मचलती   बैठ किनारे बाट …

मेरी जिह्वा मधुर बनी हो

 मेरी जिह्वा मधुर बनी हो   जिह्वाया अग्रे मधु मे जिह्वामूले मधूलकम् ____अथर्ववेद –1-34-2 मेरी जिह्वा में मधुरता हो और जिह्वा के मूल अर्थात् मानस में मधुर रस का …