Category: भूपेंद्र कुमार दवे

जब से मैंने तुम्हें निहारा

जब से  मैंने तुम्हें निहारा तुझमें मुझमें रहा ना अंतर                           तुझे  प्रतीक्षा रहती  मेरी                         मैं उलटी साँसें गिनता हूँ                         बाट  जोहता रहता है तू                         …

पीर तुम्हारी खेल रही है

पीर तुम्हारी खेल रही है पीर तुम्हारी खेल रही है मेरे आँसू के निर्मल जल में। और व्यथाऐं तेरी सारी स्याह बनी बस बहती काजल में। शक्ति मिली ना …

मैं चाहूं मेरे गीतों को

मैं चाहूं मेरे गीतों को तुम अपने सुर में गावो दिव्य पूर्णता अपने स्वर की इन गीतों में भर जावो गाते गाते राग थके जब मेघों की गर्जन ले …

ये ही तेरे मैकदे का राज खोलते हैं

ये ही तेरे मैकदे का राज खोलते हैं तेरे हाथ कँपते हैं जब जहर घोलते हैं। जहराबे-गम को अमृतकणों से जोड़ते हैं ये सोचनेवाले भी क्या खूब सोचते हैं। …

अमर शहीदों के प्रति

अमर शहीदों के प्रति शहीदों को जिगर में अपने जगाकर तो देखो कहानी उनकी, उनको सुनाकर तो देखो सुना दो उनको अमर उन्हीं की कहानी कहानी जो आँखों में …

ढूँढ़नेवालों को मेरे कई निशान मिले

ढूँढ़नेवालों को मेरे कई निशान मिले मुझी से टकराये पत्थर लहूलुहान मिले। मुझे भी मेरे गुनाहों के कई निशान मिले मुझे माफ करने वाले कई इंसान मिले। हाल मत …

मेरे ख्वाबों ने फिर से जिन्दगी पायी है

मेरे ख्वाबों ने फिर से जिन्दगी पायी है तेरी यादों ने भी कसमसाहट पायी है। ये तेरी दिलकश अदाओं का था असर जब भी मुस्कराती बहक जाती थी नजर …

चाह नहीं तेरे गीतों में

चाह नहीं तेरे गीतों में चाह नहीं तेरे गीतों में एक पंक्ति-सा मैं बन जाऊँ चाह नहीं तेरी वीणा में उलझ तार-सा बस बन जाऊँ काव्य सुधारस पाऊँ तेरा …

आता नहीं मुझे यूँ बेमौत मर जाना

आता नहीं मुझे यूँ बेमौत मर जाना सीखा नहीं हौसलों ने भी बिखर जाना। काँटों को भाता है चुभकर टूट जाना फूलों की शान है महककर बिखर जाना। हमें …

जिन्दगी भर मैं तुम्हें यूँ ही खोजता रहा

जिन्दगी भर मैं तुम्हें यूँ ही खोजता रहा होगी कब इक मुलाकात मैं सोचता रहा। सुना था तू मेरे दर आके लौट गया था क्या थी कमी मुझमें मैं …

हमने भी गर खुदा को तलाशा होता

हमने भी गर खुदा को तलाशा होता तो क्यूँकर ये हमारा तमाशा होता। करते करते तलाश उसी इक खुदा की हमने भी खुद को खूब तराशा होता। ठोकर खाके …

सोचना है इसलिये मैं सोचता हूँ

सोचना है इसलिये मैं सोचता हूँ बढ़ते गुनााहों की वजह खोजता हूँ। इ्रसानियत कहीं कुछ दिखती नही है फिर भी मैं इंसान क्यूँकर ढूँढ़ता हूँ। कलह की जड़ें दूर …

आव्हान

आव्हान बढ़ते रहेंगे कदम हमारे बढ़ते रहेंगे जब तक रहेगा यह तिरंगा हमारा हाथ में। राष्ट्रगीत भी हम सब शान से गाते चलेंगे जब तक गूँजा करेगी धुन भी …

खुश्बू के मेले

खुश्बू के मेले मैं वीरानों के झुरमुट में सोचा करता बैठ अकेले। सन्नाटों से बातें करता गुमसुम बैठा शाम सबेरे। साँसों के कोलाहल जैसे भटका करता मन के भीतर …

फटे कफन-सी काया अपनी

फटे कफन-सी काया अपनी अंत समय तक अपनी लाशें अपने काँधों रखना है। फटे कफन-सी काया अपनी बड़े जतन से रखना है। सिन्दूर सुहागिन साँसों का पुछने मिटनेवाला है …

जिन्दगी

जिन्दगी कभी अपनी, कभी बेगानी कभी अनजान-सी लगती है जिन्दगी। जानी पहचानी दुनिया में नित नव रूप लिये मिलती है जिन्दगी। बचपन में अनाथ-सी बेबस जवानी में ठगी मिलती …

चाह है कि गीत मैं कुछ ऐसा गाता चलूँ

चाह है कि गीत मैं कुछ ऐसा गाता चलूँ दर्द सारे गोद ले मैं चूमकर दुलार दूँ चीखती पुकार सभी मैं गीत से सँवार दूँ सजल सिसकती आँख को …

तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ

तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ तेरा रूप निखर जावेगा। तू भी रहमतवाला होगा मेरा मन भी तर जावेगा। सिसक रहे हैं मंदिर तेरे मेरी आँसू माला पहने डूब रहा …

कुछ तुम भूले, कुछ हम भूले

कुछ तुम भूले, कुछ हम भूले लिखने को तो शब्द मिले थे शब्दों में भी अर्थ मिले थे अनुभव के काँटों में बिंधकर अभिशापों के विषघट पीकर क्या लिखना …

मैं शून्य के अंदर अनंत की छटा हूँ

मैं शून्य के अंदर अनंत की छटा हूँ मैं धधकते सूरज की किरणों से सजा हूँ। न जाने मैं किन किन नजरों में बसा हूँ न जाने मैं किस …

मैं शून्य के अंदर अनंत की छटा हूँ

मैं शून्य के अंदर अनंत की छटा हूँ मैं धधकते सूरज की किरणों से सजा हूँ। न जाने मैं किन किन नजरों में बसा हूँ न जाने मैं किस …