Category: भावना कुँअर

ये खामोशियाँ

डॉ०भावना कुँअर ये खामोशियाँ डुबो गई मुझको दर्द से भरी गहन औ’ अँधेरी कोठरियों में। गूँजती ही रहती मेरी साँसों में प्यार-रंग में रंगी खुशबू भरी जानी पहचानी-सी बावरी …

बिछोह -घड़ी (चोका)

डॉ०भावना कुँअर सँजोती जाऊँ आँसू मन भीतर भरी मन -गागर। प्रतीक्षारत निहारती हूँ पथ सँभालूँ कैसे उमड़ता सागर। मिलन -घड़ी रोके न रुक पाए कँपकपाती सुबकियों की छड़ी। छलक …