Category: भास्कर आनंद

पत्थर या भगवान?

आत्मविश्वास से सराबोर एक उत्साही युवक, मंदिर के समीप पुजारी पर चिल्लाया, क्यों पूज रहे हो पत्थर को, कहाँ हैं भगवान, पुजारी ने मुख्यद्वार की तरफ दिखाया, द्वार पर …

चलो आज से हम भी धर्मनिरपेक्ष हो जाते हैं

किसी ने राम जन्म भूमि छीन लिया तो क्या हुआ, किसी ने कृष्ण को अनैतिक कहा तो क्या हुआ, हम इन सबको नहीं पहचानते हैं, चलो आज से हम …

माँ की रोटी

पहली रोटी फेंक दी मैंने,बोलकर माँ,ऊपर से जला है, दूसरी रोटी फेंक दी मैने,बोलकर माँ,नीचे से जला है, फिर खाया दोनो रोटियों को, बड़े प्रेम से जब देखा मैंने, …