Category: भागचन्द अहिरवार

हमाई एक नई बुंदेलखंडी कविता

एक मौडी से हमें , खूबई हतो प्यार लेकिन वा नई हती…,मिलवे को तैयार वा वी करत-ती…,का जाने काय से डरत-ती मिल गई एक दिना.., वा हमें बजार ऊतई …

इक सुंदर कविता…,क्या होती

इक सुंदर कविता…,क्या होती कवि के भावों को, शब्दों में है पिरोती कुछ तीखी, कुछ नटखट शोर-सरावा, झटपट कुछ आशाएँ, कुछ उम्मीदें रिश्तें-वादों की रशीदें अनेकों हुए कवि, अनगिनत …

जिन्दगी में

जिन्दगी में,बहुत कुछ खोया है,बहुत कुछ पाया है बेहिसाब..,किसी ने रुलाया है कोशिश भी की उनको भुलाने की इबादत में..,हर बार उन्हीं का नाम आया है     खुदा …

दिल पर उसके , खुद का राज नहीं चलता

वेबस हो जाता है, हर एक शख्स़ मोहब्बत में… दिल पर उसके , खुद का राज नहीं चलता   फिसलने लगती है हर एक चीज, उसके हाथों से अति के …

हर एक लम्हां, याद बन जाता हैं…

हर एक लम्हां, याद बन जाता हैं….. तूँ! उन यादों की किताब, क्यों सजाता हैं। जब देखता हैं, तूँ! पलटकर उन पन्नों को…. तूँ! हंसता हैं या रोता हैं, …

कवि हूँ,मैं! तूँ, मेरी कविता

कवि हूँ,मैं! तूँ, मेरी कविता, तुझे हर एक शेर-ओ-शायरी में, मैं ही पिरोता। लिखूँगा हरदम, हर पल, हर घड़ी, ये कागज़-कलम खत्म नहीं होता। होगी वो स्याही आखिरी, ये …

तूँ! मेरी गोलू मटोलू…

तूँ! मेरी गोलू मटोलू… मैं, तेरा! छेल-छबीला, नाम भोलू… इश्क़ की गली, मोहल्ला मोहब्बत वाला मैं! तेरे लिए लाया, हैदराबादी कानों के भाला तूँ! गुलकंद सी मीठी मैं! शकरकन्द …