Category: बलकार सिंह ‘सवना’

“काला कफ़न “

कुछ ख्वाब अधूरे है, जो सोने नहीं देते, एक कसक की तरह चुभते है, खोजते है जैसे मृग कस्तूरी को, न जाने क्यों अँधेरा अच्छा लगता है, जब ख्वाब …

“आतंक”

“आतंक” चेहरा वही है,सूरत वही है, हैवान वही है,शैतान वही है, क्या हश्र होता होगा अल्लाह के दरबार में, जो नादान को,बेकसूर को,बेसहारा को,कमजोर को, उस छोटे मासूमो को …

बारिश की एक बून्द

महक उठती है मिटटी की खुशबु, चहक उठती है कोयल की रंगीली राग, खिल जाती है मुस्कान चेहरे पर, सिर्फ बारिश की एक बून्द से !! लहरा उठती है …

चहकती कलम

सुबह होती है तो चिड़िया चहकती है, एक नए सवेरे का बिगुल बजाती है, लिए उड़ार मतवाली,चोगा चुगने चली है, जाग जाओ ऐ दुनिया वालो, क्यूंकि अब कलम चहकने …

नन्हीं पुकार

“नन्हीं पुकार” एक सुबह हुई,लेकिन अंधकार के साथ, जब गूंजी थी किलकारी प्यारे से शोर के साथ, बुझ गया चिराग हवा के झोके के साथ, वो दो पल ही …