Category: अविनाश कुमार

बहुत कुछ सिखाया हैं आशिकी ने !

बहुत कुछ सिखाया हैं आशिकी ने! नींद और सकून उडाया हैं आशिकी ने!! ये पूछों क्‍या क्‍या भूले आशिकी में! तुृझे छोड सब कुछ भुलाया हैं आशिकी ने!! अविनाश …

खोया खोया-सा

खोया खोया-सा रहता हूॅं अक्‍सर तेरे ही ख्‍खालों में उलझ जाता हूॅं मैं अक्‍सर तेरे सवालों में लडखडाते हुए कदमों को सभाॅंलकर जैसे ही उठने की कोशिश करता हूॅं …

मुझसे कुछ खफा-सा हैां

गाॅंव की फिजा में भ्‍ाी देखो जहर घुला-सा हैं मुस्‍कराता हर शख्‍स पर कुछ जला-सा हैं होते है सफेद-पोश वस्‍त्र यहाॅं पर जिसके जरूरी नहीं की मन उसका धुला-सा …

सोचता हूँ अक्‍सर तुझे ही न जाने क्यूँ

सोचता हूँ अक्‍सर तुझे ही न जाने क्यूँ लाख मनाता हूँ इस दिल को पर ये न माने न जानेक्यूँ रोकता हूँ खुद को टोकता हूँ खुद को पर रोक न पाऊॅं खुद को …

एक मुक्‍तक-जमीर ही मर गया इंसानों में

जमीर ही मर गया इंसानों में क्‍यों लहु भरा इन ऑखों में क्‍यों बैचनी है ख्‍वाबों में बस यही सोचता रहता हॅू मैं जमीर ही मर गया इंसानों में …

तेरी याद में अब नींद मुझे कहाॅं आती हैं

तेरी याद में अब नींद मुझे कहाॅं आती हैं पर ये कमबक्‍खत आॅंखें धक कर सों जाती हैं मैं चाहता हूॅं बस तेरे साथ जीना पर ये कमबक्‍खत सांसे …

मेरे ख्‍वाबों में ख्‍यालों की एक लडी हो तुम………………….

मेरे ख्‍वाबों में ख्‍यालों की एक लडी हो तुम…………………. इन ऑखों में बहने वाली ऑसूओं की एक लडी हो तुम पतझड में भी बसन्‍त के पहले खिले फूल की …