Category: आत्मा राम रंजन

रास्ते

डिगे भी हैं लड़खड़ाई भी चोटें भी खाई कितनी ही पगड़ंडियां गवाह हैं कुदालियों, गैंतियों या डाईनामाईट ने नहीं कदमों ने ही बनाए हैं रास्ते

नई सदी में टहलते हुए

भागते समय से ताल बिठाना बदलती सदी को कुशलता से फलांगना वह है अनाम घुड़्दौड़ का एक समर्थ घोड़ा तीव्र में तीव्रतर गति टहलने निकलने का उसका ख़्याल अपने …

देव दोष

द्वितीय किस्म के आस्थावान और दुर्लभ किस्म के सुंदर जीवन के बीचों-बीच साक्षात ईश्वर की उपस्थिति में अपने समूचे भोलेपन के साथ उन्होंने उड़ा दी एक मेमने की गर्दन।

एक लोक वृक्ष के बारे में

मदनू के मगनू तक उच्चारणों में बोला जाता हुआ तुम्हारा नाम जिज्ञासा और रहस्य से लिपटा है आज तुम्हारे व्यकितत्व की ही मानिंद मौन व्याधि तोड़ कुछ तो बताओ …