Category: अश्विनी भँवरायत

शापित नारी

कलयुगी जमीं पे जन्मीं अतिरिक्त बोझ सी भारी हूँ पुरूष प्रधान समाज की शापित पापमय नारी हूँ जंजीरे बाँधी अपनों ने बचपन मेरा अलसाया हरितमय उपवन में कहीं खिला …