Category: आशुतोष दुबे

पाठक की निगाह

कभी आप लिखते हैं कोई ख़त कभी निजी डायरी कभी महीने के खर्च का हिसाब कभी-कभी कविताएँ भी कभी आपको लिखना पड़ता है स्पष्टीकरण कभी आप बनाते हैं किसी …

नाटक के बाहर

शाकुंतल के पन्नों से निकलती है शकुंतला मृच्छकटिकम से वसंतसेना दोनों नदी के तट पर पेड़ की छाँह में बैठकर देर तक करती रहती हैं कालिदास और शूद्रक की …

अश्वमेध

उसकी धौंकनी से दम फूलता है इच्छाओं को स्वप्न उसकी टापों में लगातार बजते हैं वह एक कौंध की तरह गुज़रता है पण्य-वीथियों में श्रेष्ठि उसे मुँह बाए देखते …