Category: अशोक रावत

हाँ अकेला हूँ मगर इतना नहीं

हाँ अकेला हूँ मगर  इतना  नहीं, तूने  शायद  गौर से  देखा नहीं. तेरा  मन बदला है कैसे मान लूँ, तूने  पत्थर  हाथ का फैंका नहीं. छू  न पायें  आदमी  …

आज फिर ताले नज़र आये

हर शटर  पर आज फिर ताले नज़र आये, फिर  क़वायद में  पुलिसवाले  नज़र आये. धूल   की परतें   दिखीं  सम्वेदनाओं पर, आदमी  के  सोच  पर  जाले नज़र आये. पंक्ति में   …

न गाँधी पर भरोसा है न गौतम पर भरोसा है

न गाँधी पर  भरोसा है न गौतम  पर भरोसा है, ज़माने   को मगर  बंदूक के दम पर  भरोसा है. तुम्हारी बात तुम जानो, मैं अपनी बात करता हूँ मुझे  …

भले ही उम्र भर कच्चे मकानों में रहे

भले ही उम्र  भर कच्चे मकानों में रहे, हमारे हौसले तो आसमानों  में    रहे.     हमें तो आज तक तुमने कभी पूछा नहीं, क़िले के पास हम भी …

घर को हम बचा नहीं सके

ये तो है कि घर को हम बचा नहीं सके, चक्रवात  पर हमें  झुका नहीं     सके.   ये भी है की मंज़िलें कभी नहीं    मिलीं, रास्ते    मगर हमें थका   …