Category: अशोक बाबू माहौर

भजन (तर्ज -स्यामा तेरे चरणों की ……..)

भुमियाँ तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए सच कहता हूँ बाबा मेरा जीवन बदल जाए ! तेरे द्वार खड़ा हूँ मैं दोनों हाथ जोड़ कर के झुक …

चरित्रहीन पत्नी (कहानी )

“बेटी अनु अंदर से अपने कपडे उठा ला,चलो आज पापा जी के साथ मौसी के यहाँ घूमने जाते हैं”.मुस्कुराते शालिनी अपनी बेटी से बोली”.जी मम्मी अभी आई”अनु ने कहा. …

मास्टर जी

पहेलियाँ बुझाते मास्टर जी चौराहे पर इकठ्ठा किए लोगों को पागल बनाते कभी खुद कलम उठाकर मतवाले ढंग से गधे पर मानो निबंध लिखते निसंकोच मन से ! निचोड़कर …

गधों के महाशय

शहर से दूर गाँव में गधों के मौहल्ले में गद्दी आलीशान उसपे विराजमान महाशय गधों के करते कमाल कभी रोते हँसते मुँह फुलाए खोलकर केशों को नजरें घुमाए हाथों …

गधों के मौहल्ले में

गधों के मौहल्ले में माननीय महोदय जी पधारे खींचकर तिलक लम्बे आड़े लगाकर भभूत पहनकर खादी कुरता लपेटकर धोती ! मंच पर करते प्रहार शब्दों का माडकर शहद में …

गधों के मौहल्ले में

गधों के मौहल्ले में श्रीमान जी चकराए भूलकर खूब गोलगप्पे खाए देकर ताव मूँछ पर सिर पर बार – बार कंघी घुमाए चैन तनिक नहीं दूर जाकर आराम फरमाए! …

गधे को लव हो गया

उफ़ :ओस क्यों ? पत्तों पर धाक जमाती गुस्सा दिखाती ! मेरी पलकें भींगकर सुबह की बारिस में देखती मौसम की अँगड़ाईं, कहीं चोरी से छुपके समीर मेरे कानों …

गधे को सलाम

जब मैं ट्रैन में बैठा सफ़र कर रहा मेरे सामने एक युवक उठकर खिड़की से, बार-बार झाँकता सलाम करता न जाने किसको मुस्कुराकर मन ही मन बुदबुदाता, खिलखिलाकर हँसता! …

गधे से घोडा बोला

गधे से, घोडा बोला, अबे ओ! निकम्मे गधे तुझसे मैं अच्छा हूँ! लोग मुझको पानी से नहलाते हैं अच्छा खाना खिलाते हैं रहने के लिए आराम दायक जगह देते …