Category: अशोक आलोक

नए हालात अक्सर आज़माते हैं

नए हालात अक्सर आज़माते हैं पुराने वक्त के तेवर दिखाते हैं । बिखरते टूटते हर आशियाने में न जाने लोग कैसे मुस्कुराते हैं। ज़मीं से आसमां तक मौत के …

निकालें दिल से डर मुश्किल बहुत है

निकाले दिल से डर मुश्किल बहुत है करे पूरा सफ़र मुश्किल बहुत है। बहारें लौटकर आए किसी दिन उदासी में गुज़र मुश्किल बहुत है। किसी भी हाल में बेदाग़ …

हिफ़ाज़त में कोई पलता हुआ नासूर लगता है

हिफ़ाज़त में कोई पलता हुआ नासूर लगता है सियासत से बहुत छोटा हरेक कानून लगता है हमें तो जश्न का मौसम बड़ा मासूम लगता है किसी बच्चे के हाथों …

ख़यालों के ज़माने सामने हैं

ख़यालों के ज़माने सामने हैं हक़ीक़त और फ़साने सामने हैं मेरी ही उम्र की परछाइयां बन मेरे बच्चे सयाने सामने हैं कहानी ज़िन्दगी की है पुरानी नएपन के तराने …

दु:ख की चादर समेट बाहों में

दु:ख की चादर समेट बाहों में ख्वाब देखे हैं इश्तिहारों में चंद सांसों की ज़िन्दगी अपनी रोज़ उड़ती है ये हवाओं में बात इतनी हसीन मत करिए चाँद आने …

दोस्तों की दोस्ती और घात से गुज़रे

दोस्तों की दोस्ती और घात से गुज़रे ज़िन्दगी के खुरदरे हालात से गुज़रे ख्वाब की कलियां सजाए आशियाने में धूप ऑंखों में लिए बरसात से गुज़रे एक लम्हा चैन …