Category: आषीश दषोत्तर

दिल तेरा मुझको लगा दर्पण कोई

दिल तेरा मुझको लगा दर्पण कोई, मैं यूँ ही करता रहा दर्षन कोई। दोस्ती मुझको तेरी खलने लगी, बीच में जो आ गया चिलमन कोई। जुल्मतों से चूर तपती …