Category: अरुणाभ सौरभ

कोसी कछार पर

वो बहती रहती है हिलक लेकर उबाल मारकर लुप्त करना चाहती है कुछ घरों को उसमें सिमटे-चिपके इतिहास के धूसर पन्ने एक तफ़ानी लहर बौराई आवाज़ अट्टहास धिक्कार और …