Category: अरूण कुमार झा ‘बिट्टू’

छोर छोर वार थोरा प्यार बांट ले

छोर छोर वार थोरा प्यार बांट ले जिवन के है दिन चार अपने जुल्म थाम ले कभी सोचता है उनपर क्या बीतती है यार जिनकी गोद सूनी और जो …

हिम्मत न हार बन्दे

हिम्मत न हार बन्दे सब कुछ तेरे हाथ हैं मेहनत के नीव पर ही होते सब काज हैं दर्द के तुफान में भी हौसला बनाए रख उम्मीद की ज्योती के लौ को तू जलाए रख तप कर ही सोने पर आता नीखार हैं हिम्मत न हार……………   किश्मत निगोरी भी कब तक भरमायेगी कोशिसो की गर्मि से ये भी पिघल जाएगी अर्जुन सा मन्जिल पे नजरे टिकाए रख विश्वास के साथ अपनी चाल को बनाए रख मुहाम्मद गौरी का अ भी जिन्दा इतिहास हैं हिम्मत न.…………… मानता हूं उसके मर्जी बिन पत्ता भी नही हिलता हैं पर भूलता हैं क्यो तू वो पिता हम बच्चा हैं लायक हो बच्चे तो मां बाप भी झुक जाते हैं बच्चे की खाहिस के लिए हद से गुजर जाते हैं वो भी गुजरेगा जो तु लगन से करे काज हैं हीम्मत …

मैं चंचल मदमस्त हवा

मैं चंचल मदमस्त हवा बेहती हूं मै बलखाती हुई इठलाती हुइ लहराती हुई मुझको क्या रोक सकेगा कोई गर्मी से व्याकुल खोलीपट रखती थी खुद को छुपाती हुई घुसी …

ऐ जिन्दगी तेरे इतने मिजाज है क्यो

ऐ जिन्दगी तेरे इतने मिजाज है क्यो सब देते अलग अलग तुझे नाम है क्यो फूलो से पूछा कहते हैं बस मुस्कान है तू भवरो के लिए बस प्यार …

निगाहे बोलती हैं

निगाहे बोलती हैं इन्सान के हालात के पत्तो को खोलती हैं क्या चल रहा हैं दिल मे क्या बीज किसी ने बोया हैं क्या काटने की चाहत क्या अरमान …

मै मुद्रा चंचल बलवान

मै मुद्रा चंचल बलवान मेरी तो है अलग पहचान कभी मैं किसी के साथ कभी मै किसी के पास मेरा नही कोई निश्चित स्थान मैं….. प्रातः की सुरूआत मुझसे …

दरीन्दे छूट जाते हैं

हुआ ये हाल की अबतो दरिन्दे छूट जाते हैं लगा कर पैतरा कानून को ठैंगा दिखाते हैं छोटे हो शिकार तो केश ही दर्ज नही होते बहुत जेर लगाने …