Category: अरुण चन्द्र रॉय

पैम्फ़लेट

मुस्कुराते हैं अख़बारों के पन्नों के बीच फँसे, गुँथे, लिपटे पैम्फ़लेट ख़बरों पर और उनकी घटती विश्वसनीयता पर ख़बरों के कानो में जा के ज़ोर से चिल्लाते हैं पूरी …

पीढ़ियों से सड़े हुए दाँत

हुज़ूर पीढ़ियों से सड़े हुए हैं हमारे दाँत हमारे बाबा के बाबा थे ‘बलेल’ बुरबक कहे जाते थे वे सो वे बलेल थे ए़क साँस में घंटो तक शहनाई …

पर्स में रखी तुम्हारी तस्वीर

जब थक जाती हैं बाँहें ख़ुद से दुगुना वज़न उठाते-उठाते और कंधे मना कर देते हैं देने को संबल लेकिन फिर भी जलते सूरज के नीचे पूरी करनी होती …

ईश्वर और इन्टरनेट

बाज़ार है सजा ईश्वर और इन्टरनेट दोनों का । ईश्वर और इन्टरनेट इक जैसे हैं ईश्वर विश्वव्यापी है इन्टरनेट भी कण-कण में समाए हुए हैं दोनों हर ज्ञानी-अज्ञानी के …