Category: अर्पित कौशिक

वर्षाऋतु फिर आई है

नभ में छितरे ये बादल , कब उमड़-घुमड़ कर आएंगे , श्वेत से काले रूप बदल कर , तिमिर स्वरूप दिखलायेंगे | फिर पवन शीतल बही, मेघो को संघनित …

‘प्यारे कलाम’ —-एक काव्य श्रद्धांजलि

‘प्यारे कलाम’ —-एक काव्य श्रद्धांजलि रामेश्वरम के लाल कलाम विज्ञान के ज्ञान कलाम | प्रगति के मिसाइल कलाम , पोखरण के विस्फोट कलाम | पथ-प्रदर्शक, गतिमान कलाम , जीवन …

“नारी की अंतर-वृथा”

मैं नारी अपनी वृथा, कहती हूँ अपनी कथा | समाज के झंझालों से, अपमान के उन गलियारों से, हर पल मुझको आना-जाना है, स्वाभिमान को बचाना है || जीवन …

गणित की समस्या

“गणित की समस्या” हांलाकि और चूंकि से निकल गयी थी बात | स्टेटिक्स समझ में नहीं आई, डायनामिक्स ने मारी लात || कैलकुलस, अलजेब्रा मेरी जान के दुश्मन | …

राजतंत्र

(१) अन्याय की कीमत अब आवाम जानती है, घोटालों की हक़ीक़त हर आँख पहचानती है | ये कालचर्क कि परिणिति है मेरे दोस्तों , अब राजनीति भी सुनहरा परिवर्तन …

“मेरी माँ गंगा”

“मेरी माँ गंगा” गंगा निर्मल, उज्जवल, धवल और है पापनाशिनी | तन की मलीनता को दूर करने वाली || गोमुख में आंखियां वो खोले , हरि के दर पर …