Category: अनमोल तिवारी

दिव्य आलोक

?दिव्य आलोक ? दिव्य आलोक मय ये सुनहली रश्मियाँ प्रभात की शुभ वेला में प्रस्फुटित होते पल्लवों पर जगा रही हैं प्रत्युष मनोहर खिल रहे हैं पुष्प चहुँऔर हो …

एक तमन्ना ऐसी मेरी

है तमन्ना मेरी ऐसी___ कि, मंद- मंद पुरवाई में प्रीत के झोंके हो दिलों में गुजारू एक रात सुहानी श्वेत रेतीले टीलों में।। हो चमक चाँदी सी जब रेतीले …

गीत :-तो खिलें चमन (तर्ज =करवटें बदलते रहे)

??तो खिले चमन?? तर्ज-करवटे बदलतै रहे सारी रात हम दो कदम मिल के चले, सरहदो पे हम । तो खिले चमन तो खिले चमन। तेरी नादानियों को, भूला पाये …

वीरों पे अभिमान हो रहा हैं

तिरंगा हैं शिखर पे, जयगान हो रहा हैं। आज मुझको वीरों पे, अभिमान हो रहा हैं।। केसरिया जिसका कण-कण, वीरों की शहादत हैं। हे रंग इसका उजला, शांति की …

ग़ज़ल

कभी तो बहार बनकर मेरा मन बहलाओगे, कभी तो झोंका बन मेरा तन सहलाओगे। सदके में तुम्हारे क़दमों को चुम लेंगे हम, कभी तो अपना समझ सीने से लगाओगे।। …

चाणक्य गीतिका:-खण्डकाव्य

चाणक्य गीतिका:-भाग-1(मातृ वंदना) कवि;-अनमोल तिवारी ****श्री***** सौम्य शिखर हिम अतुल जहा, उत्तर की पवनें ठंडी हैं। परचम अपना फहराती वो, भारत भूमि अखंडी हैं।। पारावार जो अपार जल से, …

नीड

पर्वत के उस पार से नीड मे लौटते पंछी डैनों को फैलाकर कुशलक्षेम पुँछते दिन भर के थके हारे पर अहा! नहीं मिलता आराम।। जहाँ बनाया था आशियाँ बैखौफ …

अनमोल इल्तिजा

ना आएँ कभी गर्दिशों के सदके जिन्दगानी मे उनके। मेरे मालिक की यह रहम इफ्तदा हो जाए हर रोज़ करते हैं”अनमोल” इल्तिजा जिनके लिए उस महकते गुलशन पे रब …