Category: अनिमेष चंद्रा ‘माहताब’

नज़्म – एक कवि की मौत

आखरी सांस तक लड़ता रहा.   आपनी उंगली से हवा पे लिखता रहा उसे.   जितनी देर सांस चली तरसता रहा घोलता रहा खून की सिहाई और डॉक्टर्स सुलाते …

नज़्म – नींद

किसी दिन आके हाथ फैलाये खड़े हो जायेंगे   मेरी नींद के टुकड़े जिन्हें तकिये के निचे छुपाके रखता हूँ जिन्हें रात को उठ उठ कर देखता हूँ कहीं …

देश

माहौल की दुहाई देके जब देश छोड़कर आये थे दोस्ती, रिश्ते, नातें, घर सब तोड़कर आये थे.   छोड़ आये थे गलियाँ और प्यारे खेत खलियान पड़ा रहा पीछे …

महत्वाकांक्षा

संभाबना के उच्याशा  में खोये है इस मन का चैन रातों को न सो कर केवल सपना देखे हैं दो नैन । कभी ख़ुशी के साथ निमंत्रण, कभी विसर्जन …