Category: अनिल करमेले

मैं रोज़ नींद में लोहे की धमक सुनता हूँ

जेठ की घाम में बन रही होती, मि‍ट्टी बोवाई के लि‍ए तपे ढेले टूटते, लय मेंउसी लय में भीमा लुहार की सांसें फड़कती, फि‍सलती हाथों की मछलियाँ भट्टी में …

इनर ग्राउंड

जून में इनर ग्राउंड कैसा दीखता होगा इसकी कल्पना बहुत मुश्किल थी अप्रैल की आख़िरी तारीख़ को मिले परीक्षाफल की खुशी को समेटे हम दो महीने बाक़ी दस महीनों …