Category: आनंद तिवारी

गीतों में मेरे डूबो तो

मेरे अंतस में मत झाँको आँख तुम्हारी नम होगी गीतों में मेरे डूबो तो पीड़ाएँ कुछ कम होंगी । जीवन तो मृगतृष्णाओं के जंगल जैसा है जैसा तुमने सोचा …

खूँटियों पर टँगे हैं लोग

नेकी बदी की गठरी बाँधे खूँटी-खूँटी टँगे हैं लोग किसे क्या बताएँ सब अपने रंगों में ही रंगे हैं लोग । दुनिया लगती है बेमानी आसमान झूठा लगता है …