Category: आनंद नारायण मुल्ला

लहू का टीका

वतन फिर तुझको पैमाने-वफ़ा देने का वक़्त आया तिरे नामूस पर सब कुछ लुटा देने का वक़्त आया वह ख़ित्ता देवताओं की जहां आरामगाहें थीं जहां बेदाग़ नक़्शे-पाए-इंसानी से …

सफ़-ए-अव्वाल से फ़क्त एक ही मयक्वार उठा

सफ़-ए-अव्वाल से फ़क्त एक ही मयक्वार उठा । कितनी सुनासान है तेरी महफ़िल साकी ।। ख़त्म हो जाए न कहीं ख़ुशबू भी फूलों के साथ, यही खुशबू तो है …

निगाहों दिल का अफसाना

निगाहों दिल का अफ़साना करीब-ए-इख्तिताम आया । हमें अब इससे क्या आया शहर या वक्त-ए-शाम आया ।। ज़बान-ए-इश्क़ पर एक चीख़ बनकर तेरा नाम आया, ख़िरद की मंजिलें तय …