Category: आनन्द कुमार

“सुप्रभात”

देखो द्वार पर खुशियाँ हैं आयीं सूर्य का देख ‘छविजाल’ ‘तरनि-पुत्रि’ मुस्कायी, पुष्पों ने ‘पंखुड़ि-पट’ खोले अधरों से ‘मकरंद’ पियें ‘भँवरे’ देखो ‘कलिका’ रस भर लायी, उत्ताल करो हृदय …

“हम भारतवासी”

“हम भारतवासी-हम भारतवासी” “न कोई हिन्दू , न कोई मुस्लिम” न कोई धर्म-राशी , “हम भारतवासी- हम भारतवासी” । हम तो हैं ,भारत की सन्तानें जाति-पाँति हम क्या जानें …

“उन्हें प्रणाम”

हे ! स्वतंत्र देश के वासी , ‘निश्छल’, ‘निष्पाप’ हृदय राशी जो दे गये तुम्हें ‘अमृत’ दान कर जोड़ करो “उन्हें प्रणाम”। जो मिट गये इस ‘भू’ पर आजादी …

शायरीः सच्ची मोहब्बत

मोहब्बत की कोई कीमत नहीं होती, इसमें दौलत की कोई अहमियत नहीं होती, सच्ची मोहब्बत तो आँखों से बयाँ होती है, इसके लिए किसी इम्तिहाँ की जरूरत नहीं होती …

“मेघ-वर्षा”

ओह ! वो पूरब के ‘व्योंम’, घिरते आते ‘घनश्याम’, जस सुबाम पश्च केशपाश , तस शुचि व्योंम पश्च घिरते घनश्याम । उमड़ि-घुमड़ि , चमकि-दमकि, विजन अम्बर में करते रोर, …

शायरीःजख्म-ए-मोहब्बत

गर तुमने मुझे समझा होता ‘काबिल-ए-मोहब्बत’ तो छोंड़ न जाते मुझे ‘बीच-ए-समन्दर’ वक्त की जरूरत ने मुझे मरने न दिया नहीं तो डूब जाता मैं उसी में ‘ऐ -बे-मुरब्बत’ …

“जिन्दगी-एक:कर्म-पथ”

चल पड़ी जिस तरफ जिन्दगी मन्थर-मन्थर धूमिल पथ पर, कुछ फिसलती कुछ सम्भलती मुट्ठी से जैसे रेत निकलती ! सूर्य धुँधला सा, छिपा जा रहा बादलों में, सिमटती जा …

शायरी : ‘जुनून-ए-इश्क’

ये तड़प भी बड़ी अजीब होती है, पर क्या करुँ ? दिल को’अजीज’ होती है, छुप-छुप के मोहब्बत करने की जरूरत नहीं, हम तो’वर्णान्ध’हैं, ‘जुनून-ए-इश्क’के सफर में ।। -आनन्द …

शायरी : ‘हाल-ए-दिल’

कैसे बताऊँ मैं उन्हें, अपने’दर्द-ए-दिल’का गुजरता नहीं वक्त उनको देखे बिना, गैरों से मिलके तुमने सताया बहुत है, करुँ क्या ?’गुस्ताख-दिल-ए’ मानता नहीं है ।। -आनन्द कुमार