Category: अमोल गिरीश बक्षी

नेकीवाला दरिया

बापूजी, आपका नेकीवाला दरिया अब दिखता नहीं बेईमानी के बाज़ार में शायद आपका सच बिकता नहीं भर भर के खुशियां जेबों में तो रखी है पर वक़्त निकालकर शायद …

ओस में धुलकर, रोशनी में घुलकर

ओस में धुलकर, रोशनी में घुलकर मखमल का चोला है आई पहनकर चकाचौंद चारों दिशाओं में छाई बिखरे है मोती धरती पिघलकर   अधखुले गुलाब दामन से लिपटे तितली …