Category: अमोद ओझा ‘रागी’

!! तिरछे प्रकाश में !!

नभ जल रहे थल जल रहे, सब जल रहे सब चल रहे, चिड़िया चिल्लाती आकाश में, सूरज के तिरछे प्रकाश में, सुखी नदियां जली दिशायें, जलती पत्ती पेड़ शाखाएँ …

!! प्रियवर मुझे घर जाने दो !!

प्रियवर मुझे घर जाने दो, कल, यही फिर आने को. गदबेरा की बेला है आई, सुनो! इसी में है चतुराई, संध्या ने भी ली अंगड़ाई, रोशनी भी है कुम्हलाई, …

!! मुझे कहीं गर जाना होता !!

लेके लाठी नंगे पाँव बस, गठरी बांध रवाना होता, मुझे कहीं गर जाना होता. !! आशाओं और उम्मीदों के, पंख पखार सायना होता, मुझे कहीं गर जाना होता. !! …

!! आतंक वाद !!

म्रित सय्या पे सोना है, आतंक वाद गुल्फ़ामे हुस्न. नाही इसके जात पात है, नाही है जनाने हुस्न. बम बारूदों से पिघले है, मतवाले मस्ताने हुस्न. नाही इनकी सीमा …