Category: अमिताभ श्रीवास्तव

गुलशन में चंद कलियाँ…

गुलशन में चंद कलियाँ अभी भी बाक़ी हैं, ख्वाहिश वो उनसे मिलने की अभी भी बाक़ी है | जलाया था ये सारा शहर किसी ने कभी, शहर में राख …

सोचो ! अगर इंसान न होता… (एक और प्रयास)

सोचो ! अगर इंसान न होता तो क्या बुरा होता और क्या अच्छा होता सोचो ! अगर इंसान न होता… ज़मीं पे ये जो पड़ा होता है न ‘कूड़ा’ …

गुस्ताखियों से अपनी…

गुस्ताखियों से अपनी सिला पूछ रहा हूँ । नादाँ हूँ जो माज़ी का पता पूछ रहा हूँ ।। वादा-ए-वस्ल करके हरदम वो तोड़ती है । है कौन सी ये …

ये मोहब्बत करने वाले…

ये मोहब्बत करने वाले हमें क्या सिखा गए। तुमको तो दीवाना हमे शायर बना गए।। जवान होती बेटियां और बूढ़े होते माँ-बाप। इंसान के ईमान को कायर बना गए।। …

खून के रिश्तों में…

खून के रिश्तों में अब खून नही दिखता। माँ-बाप की आँखों में वो सुकून नही दिखता।। बदली है वक़्त की फ़ितरत भी कुछ ऐसी। आशिक़ की आँखों में वो …

दीदार-ए-यार-ए-ख्वाब की…

दीदार-ए-यार-ए-ख्वाब की हरसू है आरज़ू । ज़िन्दगी स्याह रात है ऐ ख्वाब कहाँ है तू ।। ज़िंदगी में अब लगे है साँसें बुझी बुझी । थोड़ी जान तो अब …

इश्क़ में मेरे उनकी जानिब…

इश्क़ में मेरे उनकी जानिब, कुछ शिद्दत तो है। किसी तरतीब मुझे जवाब देना उनकी फ़ितरत तो है।। फ़ासले का इल्म नही है, न दीदार-ए-यार का गम। सुकून है …

यादों का दस्तावेज़… (नज़्म)

यादों का दस्तावेज़ वक़्त की पुरानी दराज़ से यादों का एक दस्तावेज़ मिला है आज। कहीं कहीं से तारीखों से क़ुतरा हुआ, हर्फ़ भी जिसके कुछ धुंधले जान पड़ते …

चाहतों की इमारतें… (एक प्रयास)

इस ग़ज़ल में कुछ नया करने का प्रयास किया है। उम्मीद है आप सब इसका लुत्फ़ उठाएंगे। चाहतों की इमारतें सब पुरानी हो गयीं। कोई ताजमहल हो गयी तो …

मेरे बच्चों से…

मेरे बच्चों से मेरी अब यही फ़रियाद होती है। मेरे कमरे के दरवाज़े से अब आवाज़ होती है।। जिसे पढ़कर जलाता है वो शहर की बस्तियां अक्सर। वो मज़हब …

जो सुनना चाहते हो…

जो सुनना चाहते हो तुम, जुबां वो कह नही पाती। जो दिल में आरज़ू है इक, जुबां पर क्यूँ नही आती।। सामने रोज़ आते हो ख़यालों में हक़ीक़त में। …

मेरे ख़्वाबों में आ आ कर… (गीत)

मेरे ख़्वाबों में आ आ कर, बढ़ा जाती है धड़कन को मेरी तन्हाइयों में आ, सजा जाती है महफ़िल जो। ख़ुदा मुझको बता दे ये कि मुझसे कब मिलेगी …

अपनी हालत पे ज़रा…

अपनी हालत पे ज़रा तो रहम खाया कीजिए, मेरी खातिर ही सही पर मुस्कुराया कीजिए। माना के हैं ग़म बहुत ज़िन्दगी में आपकी, हमसे मिलकर आप अपना ग़म भुलाया …

कभी कश्तियों की निगाह से…

कभी कश्तियों की निगाह से समन्दरों को तक़ा करो। एक मौज में है डूबना एक मौज में फिर ज़िंदगी।। वो ‘दिया’ था उसने भी एक रोज़ कहा था अपनी …

तेरी आँखों ने क्या…(गीत)

तेरी आँखों ने क्या जादू किया मेरे ख़्वाबों में तुम आने लगे मुझे तुमसे नहीं था शिकवा कोई मुझे क्यूँ कर तुम आज़माने लगे ।। कभी पास मेरे होते …

देखा अंदाज़-ए-बयाँ…

देखा अंदाज़-ए-बयाँ जब उसका। हमको अपने पे यूं मलाल हुआ।। दास्ताँ उसने कुछ अदा से कही। बज़्म-ए-अशआर में शुमार हुआ।। क़त्ल का कोई सामां न था फिर भी। निगाह-ए-तीर …

तू ही मेरी दुनिया…

तू ही मेरी दुनिया तू ही मेरा अरमाँ। तुझे ये फ़साना मैं कैसे सुनाऊँ।। लिखी है ग़ज़ल ख़ूबसूरत सी मैंने ग़ज़ल में लिखा है मोहब्बत है तुझसे, हाल-ए-दिल कह …