Category: अमीर खुसरू

परदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना

परदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना। बिर का दुख बहुत कठिन है प्रीतम अब आजावना। इस पार जमुना उस पार गंगा बीच चंदन का पेड़ ना। इस …

दैया री मोहे भिजोया री शाह निजम के रंग में।

दैया री मोहे भिजोया री शाह निजाम के रंग में। कपरे रंगने से कुछ न होवत है या रंग में मैंने तन को डुबोया री पिया रंग मैंने तन …

तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम

तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम, तोरी सूरत के बलिहारी । सब सखियन में चुनर मेरी मैली, देख हसें नर नारी, निजाम… अबके बहार चुनर मोरी रंग दे, पिया रखले …

ढकोसले या अनमेलियाँ

भार भुजावन हम गए, पल्ले बाँधी ऊन। कुत्ता चरखा लै गयो, काएते फटकूँगी चून।। काकी फूफा घर में हैं कि नायं, नायं तो नन्देऊ पांवरो होय तो ला दे, …

जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या

जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या, घुँघटा में आग लगा देती, मैं लाज के बंधन तोड़ सखी पिया प्यार को अपने मान लेती। …

काहे को ब्याहे बिदेस

काहे को ब्याहे बिदेस, अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस भैया को दियो बाबुल महले दो-महले हमको दियो परदेस अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस …

अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई

अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई, जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई। छाप तिलक सब छीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाई के, बात …

घूम घुमेला लहँगा पहिने,

घूम घुमेला लहँगा पहिने, एक पाँव से रहे खड़ी आठ हात हैं उस नारी के, सूरत उसकी लगे परी । सब कोई उसकी चाह करे है, मुसलमान हिन्दू छत्री …

अबुल हसन यमीनुद्दीन मुहम्मद

१. तरवर से इक तिरिया उतरी उसने बहुत रिझाया बाप का उससे नाम जो पूछा आधा नाम बताया आधा नाम पिता पर प्यारा बूझ पहेली मोरी अमीर ख़ुसरो यूँ …

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां | कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां || शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ़ वा रोज़-ए-वस्लत चो उम्र कोताह, …

छाप तिलक सब छीनी रे

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके प्रेम भटी का मदवा पिलाइके मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ बईयाँ पकड़ धर …