Category: अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

मुक्तिका: मन मगन नित्य आँगन बुहारे सखे..

मुक्तिका: चाहता है हृदय आज आ रे सखे. मन मगन नित्य आँगन बुहारे सखे.. बंद आँखें खुलीं हैं अभी आज जब, रूप की राशि नयनों के द्वारे सखे. रोकता …

ये पर्दा है किससे??

खुलेआम सड़कों पे सबको धता दो ये पर्दा है किससे हमें भी बता दो …………………………………………….. सभी से है पंगा जो तीखे हैं तेवर हो मासूम फिर भी छिपाती हो …

“तू कवि बन न जाना”

अजी चाहे जब गीत औरों के गाना चहकना बहकना व सीटी बजाना गुसलखाने में मस्त हो गुनगुनाना मगर मेरे भाई तू कवि बन न जाना …………………………………………. कविता बहुत से …

माँ भगवती स्तुति हरिगीतिका

माँशैलजाश्रीभगवतीशुचि अम्बिकागौरीत्वयं . त्वंअष्टभुजदुर्गाशिवानी चंडिकाज्वालास्वयं . उद्धारिकारिपुदुष्टदैत्यं हारिणीजगदुःखभयं . शरणागतंशिवशक्तिरूपं दंडवतवन्देवयं ..   रचनाकार : इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’ दूरभाष: 09415047020, 05862244440

श्री विष्णुस्तुति हरिगीतिका

शुचिशंखचक्रंकौमुदीकर पद्मशेषंशोभितं . गरुणध्वजंअजलक्ष्मीपति वासुदेवंध्यायितं . शुभश्रेष्ठतंशृंगारतुलसी शालिग्रामेअच्युतं . हृदवन्दनंविधुविष्णुरूपं कल्किकृष्णंकेशवं ..   रचनाकार : इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’ दूरभाष: 09415047020, 05862244440

श्रीशिवशैलजा स्तुति हरिगीतिका

शुचिगौरवर्णीहिमसुताहर नीललोहितशंकरं . भुवनेशभद्रंभगवतीमाँ रूपराशिमनोहरं . प्रभुशीशगंगा पापनाशिनि अम्बिकाद्वैपूजितं . शरणागतं सर्वेश्वरंशिव शैलजासुरवंदितं ..   रचनाकार : इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’ दूरभाष: 09415047020, 05862244440

पूज्य गुरुदेव स्तुति हरिगीतिका

गुरुदेवत्वंशुचिज्ञानपुंजं कोटिसवितासमप्रभं . द्विजजन्मदातापञ्चरिपुहर सिद्धिदायकतमहरं . सद्बुद्धिशुभसन्मार्गप्रेरक गुरुकृपामममस्तकं . कुरुध्यानअंबरदंडवतनित आदिगुरुपरब्रह्मत्वं ..   रचनाकार : इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’ दूरभाष: 09415047020, 05862244440

प्रभु हनुमान स्तुति हरिगीतिका

शिवरुद्रएकादशत्वमेंयं पवनतनयंध्यायितं | नृपकेसरीहरिअंजनासुत पञ्चमुखप्रभुपूजितं | शनिदम्भहर्तादुष्टदलनं ज्ञानवीरंशोभितं , शरणागतंसियरामभक्तं हनुमतंसुरवंदितं || रचनाकार : इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

श्रीराधाकृष्ण स्तुति हरिगीतिका

करबांसुरीमनमोरश्यामल उज्ज्वलाद्वैशोभितं | शुचिभावमुद्राछविमनोरं अखिलविश्वंमोहितं | सुखशांतिदात्रैलोक्यपूजित रूपराधावल्लभं | शरणागतंशुभभगवते गोवासुदेवंकेशवं || रचनाकार : इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’  

भगवान् चित्रगुप्त स्तुति हरिगीतिका

मसिलेखनीकरश्यामवर्णी सृष्टिपूजितध्यायितं | दुःखपापहर्तामोक्षदायक न्यायईशंवंदितं| सदबुद्धिदायककर्मयोगी ओंकारंपूजितं, शरणागतंप्रभुरूपपावन चित्रगुप्तंशोभितं|| –इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

माँ सरस्वती स्तुति हरिगीतिका

शुचिशुभ्रवसनाशारदा वीणाकरेवागीश्वरी | कमलासिनीहंसाधिरूढ़ा बुद्धिदाज्ञानेश्वरी | अमृतकलशकरअक्षसूत्रं पुस्तकंप्रतिशोभितं, शरणागतंशुभसत्त्वरूपा वेदमातावंदितं || — इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

श्री महालक्ष्मी स्तुति हरिगीतिका

श्रीवैष्णवीभृगुख्यातिजनिता सिन्धुतनयाशोभितं| पद्मासिनीकरशंखकमला स्वर्णदासुरपूजितं| हेऋद्धिदायिनिसिद्धिरूपा पूजितं गजवंदितं, श्रीविष्णुभार्याविश्वमाया लक्ष्मीजनमोहितं|| रचयिता : –इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

“जिन्दगी का गीत”

मुश्किलें हैं रास्तों में आज इनसे होड़ ले. जिन्दगी भी रेस है तू दम लगा के दौड़ ले. मंजिलें अलग-अलग हैं रास्ते जुदा-जुदा, गर तू पीछे रह गया तो …

ग़ज़ल : इन्साफ जो मिल जाय तो दावत की बात कर

इन्साफ जो मिल जाय तो दावत की बात कर मुंसिफ के सामने न रियायत की बात करतूने किया है जो भी हमें कुछ गिला नहीं ऐ यार अब तो …

बाल श्रम : छंद कुण्डलिया

(१) बालिका की नज़र से फोटो खींचा खींच लो, जानूं नहिं क़ानून. मैं तो फ़र्ज़ निभा रही, मेरा देख ज़ुनून. मेरा देख ज़ुनून, घूरते लोग अचम्भा. साफ़ करूं वह …

ग़ज़ल : हुस्नवाले भी अजी हद से गुजर जाते हैं

(बहरे रमल मुसम्मन मख्बून मुसक्कन फाइलातुन फइलातुन फइलातुन फेलुन. २१२२ ११२२ ११२२ २२) जब भी हो जाये मुलाक़ात बिफर जाते हैं हुस्नवाले भी अजी हद से गुजर जाते हैं …

ग़ज़ल : हर शख्स नारियों पे अभी मेहरबान है

हर शख्स नारियों पे अभी मेहरबान है पानी में कितना कौन है नारी को ज्ञान है. नवजात बाँधे पीठ करे हाड़तोड़ श्रम, तकदीर से गिला न ये गीता-कुरान है. …

उसको दुश्मन माना है…

भारतवासी हम सब सारे इसको माँ ही जाना है माँ को जो भी आँख दिखा दे उसको दुश्मन माना है लूटा मुगलों ने पहले फिर अंगरेजी बाराह मिले झेल …

‘एक बनें एक रहे, विश्व हो हमारा’

सिंधु बिंदु-बिंदु हिंदु, एक रूप सारा हिंदु-जाति जाति  नहीं , है विचारधारा. एक साथ रहते थे, धूप-छाँव सहते थे हिन्दू ही भाई थे, बने जो इसाई थे सिक्ख वीर …

सीतापुर-महिमा गीत

(मत्त सवैया छन्द आधारित) सीतापुर सबके मन भाये, अपना पावन है ग्राम यहाँ मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2 यह अमर शहीदों की धरती, …

“हाँ तोड़ती पत्थर”

पूर्ण यौवन पर दहकते भानु के अंगार पंखुड़ी से होठ उसके शुष्क थे इस बार प्यास से अवरुद्ध होता था गला घोर अंतस के तिमिर में हो विलीन कोंचती …

भगवान विश्वकर्मा स्तुति

(छंद गीतिका) भाद्रपदशुभशुक्लपक्षे प्रतिपदाप्रतिशोभितं. मातृभुवने सुतप्रभासे सिद्धिजनकंमोहितं. विश्वकर्माविधिविराटं पञ्चमुखप्रभुपूजितं. सर्वकर्मसुवन्दनंकुरु देवशिल्पीध्यायितं.. –इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

श्री गणेश स्तुति हरिगीतिका

शिवशैलजासुत पूज्य प्रथमं मोक्षज्ञानप्रदायकं. गुरुगजबदन गणपतिगजानन विध्ननाशविनायकं. शुभ वंदनं प्रभु पाशधारी अस्त्र अंकुशशोभितं, नत नमन ‘अम्बर’ एकदंतं सिद्धिबुद्धिसुमोहितं || –इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर'(ऋद्धि, सिद्धि व बुद्धि : गणेश जी …

महाकवि तुलसी-महिमा

दन्त पंक्ति पट खोल, मुख महिं बोला राम जब| सुत उपजा अनमोल, हुलसी हुलसी, जग चकित|| (सोरठा) राजापुर शुभ रत्न समाना| उपजा जहँ तुलसी विद्वाना|| छंद शिरोमणि बाबा तुलसी| …

भारतमाता-गान

शत-शत वंदन भारत माता धन्य हमारी माटी, सदाचार ही बने आचरण ऐसी हो परिपाटी| केरल तमिल चरण माता के सिंह हस्त गुजराती वक्षस्थल उत्तर प्रदेश शुभ सब संतान अघाती …