Category: आलोक उपाध्याय

खो गया शायद बच्चो का संसार a poem of school life stress by Alok Upadhyay

लाद के कंधो पे भारी से बस्ते, चल पडे वहाँ जहाँ भटका गएँ रस्ते, रो-रो कर करने लगे वो पढाई, मानो किताबो से है उनकी लडाई., माँ-बाप को बच्चो …

मेरे यारो का पागलपन Funny Friends of ALOK UPADHYAY

वो मेरे यारो का पागलपन जिसपे फिदा है मेरा मन, वो मेरे यारो का हसनाँ-हसानाँ और क्लासं मे मेरा गाने गाना, Sanju bhatia का आपस मे लडना वो अपने …

मोबाईल बना हैँ हर लड़की की शान

मोबाईल बना हैँ हर लड़की की शान … Miss काल करके लड़को को करती हैँ परेशान, ॰ ॰ SMS मेँ लिखती Miss U मेरी जान.. तुम्हारी आवाज़ सुननेको तरसे …

मगर आलोक तूँ अपने आप को सिर्फ हिन्दुस्तानी लिख

ये हिन्दू वो मूस्लिम तूँ ईसाई वे सिख.., मगर आलोक तूँ अपने आप को सिर्फ हिन्दुस्तानी लिख…! तेरा अल्लाह ईश्वर एक है, तेरे ईरादे अगर नेक है.., तो तेरा …

अंग्रेज़ी VS अंग्रेज़ी : HINDI VS ENGLISH poem by ALOK UPADHYAY

अंग्रेज़ी सीना तान घमण्ड में खड़ी है।। दूर कहीं कोने में ‘हिंदी ‘उर्दू ‘लज्जित पड़ी है।। नमस्ते सलाम की जगह लेली hi ने।। अलविदा दस्तूर को लात मर दी …

एक-दूसरे से हाथ मिलाओ…

हँसो और हँसाओ, सूनहरे गीत गाओ.. सबको सूनाओ… क्या रखा है लडने मे, आपस मे झगडने मे.. एक-दूसरे से हाथ मिलाओ… भगवान पे पैसे मत उडाओ… एक-दूसरे के भगवान …

चलो कुछ पुराने दोस्तों के

, ? दरवाज़े खटखटाते हैं, देखते हैं उनके पँख थक चुके है, या अभी भी फड़फड़ाते हैं, हँसते हैं खिलखिलाकर, या होंठ बंद कर मुस्कुराते हैं, वो बता देतें …

वो कल भी भूखा सोया था फुटपाथ में

वो कल भी भूखा सोया था फुटपाथ में, अचानक खूब पटाखे चले रात में. झूमते चिल्लाते नाचते लोगों को देखा तो हर्षाया, पास बैठी ठिठुरती मां के पास आया. …