Category: आलोक श्रीवास्तव

अम्मा

चिंतन दर्शन जीवन सर्जन रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा उसने खुद़ को खोकर मुझमें एक नया आकार लिया है, धरती अंबर …

ले गया दिल में दबा कर राज कोई

ले गया दिल में दबा कर राज कोई, पानियों पर लिख गया आवाज़ कोई । बांध कर मेरे परों में मुश्किलें, हौसलों को दे गया परवाज़ कोई । नाम …