Category: अख़्तर अंसारी

साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं

साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं एक तस्वीर-ए-मुहब्बत है जवानी गोया जिस में रंगो की एवज़ ख़ून-ए-जिगर …

वो इत्तेफ़ाक़ से रस्ते में मिल गया था मुझे

वो इत्तफ़ाक़ से रस्ते में मिल गया था मुझे मैं देखता था उसे और वो देखता था मुझे अगरचे उसकी नज़र में थी न आशनाई मैं जानता हूँ कि …