Category: अज़ीज़ लखनवी

ये मशवरे बहम उठे हैं चारा-जू करते

ये मशवरे बहम उठे हैं चारा-जु करते अब इस मरीज़ को अच्छा था क़िबलरु करते कफ़न को बाँधे हुए सर से आए हैं वरना हम और आप से इस तरह …

जलवा दिखलाए जो वो खुद अपनी खुद-आराई का

जलवा दिखलाए जो वो खुद अपनी खुद-आराई का नूर जल जाये अभी चश्म-ए-तमाशाई का रंग हर फूल में है हुस्न-ए-खुद आराई का चमन-ए-दहर है महज़र तेरी यकताई का अपने …