Category: अजय कुमार बनास्‍या

कठिन है राह-गुज़र थोड़ी देर साथ चलो

कठिन है राह-गुज़र थोड़ी देर साथ चलो। बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी देर साथ चलो। तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता है ये जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ …

सता-सता के हमें

सता-सता के हमें अश्कबार करती है तुम्हारी याद बहुत बेक़रार करती है। वो दिन जो साथ गुज़ारे थे प्यार में हमने तलाश उनको नज़र बार-बार करती है। ग़िला नहीं …

गजल

जवान रात के सीने पे दूधिया आँचल मचल रहा है किसी ख्वाबे-मरमरीं की तरह हसीन फूल, हसीं पत्तियाँ, हसीं शाखें लचक रही हैं किसी जिस्मे-नाज़नीं की तरह फ़िज़ा में …

छोटी कविताऐ

एहतियाते – नजर को क्या कहिये जनाब नजर मिलाते है वो नजर बचIते हुऐ ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ तुम्हे देखते ही उलझने बढ जाती है मेरी उलझने सुलझाने मे तुम ना मेरी …

खुदा ने जब ​​तुझे बनाया होगा

खुदा ने जब ​​तुझे बनाया होगा इक सुरूर सा उसके दिल मे आया होगा सोचा होगा क्या दुगा तोहफे मे तुझे, तब जाके उसने मुझे बनाया होगा …

काम अब कोई न आएगा

काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा बायस-ए-रश्क़ है तन्हा रवी-ए-रहरौ-ए-शौक़ हमसफ़र कोई नहीं दूरी-ए-मंज़िल के सिवा हम ने …

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं.. तुम मत मेरी मंजिल आसान करो.. हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते.. मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते.. सच कहता हूं जब …