Category: अजय कुमार

जब जाता है कोइ अपना छोड़ कर…

माना मैने एक दुनीया बनाया था लम्हो को जोड कर एक आशियाना बनाया था तीनका तीनका जोड कर कमबख्त तुफान भी निकला कमाल का दुश्मन उडा ले गया अशियाना …

कोई शक्स हमारा होगा…..

किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा वो किसी और दुनिया …

आइने कि तरह गुजरी है जिन्दगी मेरी…..

एक हवा आये और कर दे तेरे हवाले मुझको इससे पहले की कोइ और बहाले मुझको आइने कि तरह गुजरी है जिन्दगी मेरी टूट्ने से डरता हु बिखरने से …

तुने ये मोहब्बत बनायी क्यु है?

या खुदा तुने ये मोहब्बत बनायी क्यु है, गर बनायी है तो मोहब्बत मे जुदायी क्यु है, इस जुदायी का कोइ अजांम तो हो, फिर मिलने कि आशा या कोइ …