Category: अभिषेक शर्मा

इंसानियत का दौर

अर्जुन है तू इस रण का धर्म के अपने शस्‍त्र को थाम बीता काले युग का अंधेरा अब नया सवेरा न्‍याय का मुकाम भ्रष्टाचार और बढ़ती लालच का देखो …

रोशनी की बहार

प्यारी दीवाली प्रेम का यह उपहार है घी के  दीप और  रोशनी  की बहार है भूल  जाओ  सब  अपने दर्द को आज खुशियां बांटो दीपोत्सव का प्‍यौहार है __________अभिषेक …

दीप जलाये राधा

झुका के नैना शर्माये राधा प्रेम के दीपक जलाये राधा मुधर मिलन ये राधा कृष्ण का श्‍याम के साथ मुस्‍कुराये राधा ___________अभिषेक शर्मा “मुक्तक”

मधुर प्रेम व्‍यवहार

**************************************************** मधुर प्रेम व्‍यवहार से ही जीवन सहजोर है सच्‍चा मित्र वो जो संकट  मे अपनी ओर है सुख में सब साथी  पर दुख में जो साथ दे, मन …

आतंक का मंजर “मुक्तक”

******************************************************** सरहदों के  उस पार  आतंक का  बडा मंजर है कर दोस्‍ती  पीठ पर  मारता ये  रोज खंजर है कैसे समझौता करें इस दोगले पाकिस्तान से आतंकवाद का ये …

खुशीयो का ख्वाब-मुक्तक

कब  देगी इस दिल को  जवाब इश्क तुझे  करता ,मे  बेहिसाब कभी  न  करू  मे   तुझे  उदास जीवन फिर खुशीयो का ख्वाब अभिषेक शर्मा अभि  

कश्‍मीर में लहराता तिरंगा

******************************************************************** अन्‍धेरी रात में पीठ पर किया तुमने वार है हिम्‍मत अब देखना तुम युद्ध ही आर पार है भारत तो एक है अब होगें तेरे कितने टुकड़े पाक …

हिंद के वीर तैयार है

********************************************************** हिंद के वीर इनका सुनहरा जो इतिहास है शौर्य पराक्रम से लडते देश का विश्‍वास है घमंड दुश्‍मन का मिटाने तैयार है जवान युद्ध में निपुण वीरता ही …

शाहदत का दिन

************************************************************************ शाहदत का दिन हुई वीरों की पहचान अब शौर्य से लडे वीरों से नही कोई अंजान अब माँ भारती की गोद है इन वीरो को पुकारती कौशल और …

आँखों से लहू है बरसें

———————————————————- सब के दिल में एक नई आस है आज दिल सब का ही उदास है निकलते आंसू कब से ही में इन्‍हे रोकती आज घर सजाये कैसे में …

मजदूर

***************************************************** जमाने का ये क्‍या दस्‍तूर है रोता हमेशा भूखा मजबूर है! हर पल बहाता है खून पसीना रोटी के खातिर ही मजदूर है। दुनिया की रौशनी से ये …

अनूठी सवारी

—————————————————– मुषक की ये करते अनूठी सवारी है भक्‍ति में हुई दिवानी दुनिया सारी है कितने सुन्‍दर सजें आज पंडाल सारे गणपति की लीला तो सब से न्‍यारी है …

छोड ही दो आराम

ज़न्नत को गर पाना दिल रखना है सा़फ आतंक और मक्कारी से होते सब है ख़िलाफ़ मालिक का यह रास्‍ता है समझ ले इसांन अच्‍छा काम ही करता रहे …

वाणी में अमृत घोले हिन्‍दी भाषा

************************************************************ राष्ट्र भाषा हिन्‍दी से सुशोभित प्‍यारा है हिन्‍दुस्‍तान सुनहरा इतिहास हमारा हम सब को देता है ज्ञान भारत की है सुन्‍दर महिमा गाये हमारा वेद पुराण वाणी में …

कृष्ण नाम केा अपना कर

—————————————————– कृष्ण विराग में बीते ये दिन हर पल कृष्ण पास रहॅू कृष्ण नाम केा अपना कर, जीवन भर तेरी  दास रहॅू ओढनी ओढ रखी भक्‍ति की प्रभु तेरा …

झील 2

———————————————————————— चारो तरफ सुकून का सन्नाटा पसरा देखो दिल को भाये खुशियों का घर दूसरा देखो लहकती ये बहारे तेज हुआ हवा का झोंका गाता गीत दिल प्रेम से …

झील

***************************************************** नीले आकाश में बहारों का नजारा देखो। सुन्‍दर झील में ठहरा पानी का किनारा देखो । हर तरफ छायीं है महक कुदरत की मानो धरती पे सजा ये जन्नत …

प्रेम की वर्षा

***************************************************** प्रेम की वर्षा में अमृत की है धार यादो में अब हर पल बडता है प्‍यार सुरत मन मे बसी फिर क्‍यो हो उदास तड़पाता रुलाता फिर भी …

प्रभात की किरन

***************************************************** प्रभात की किरन से रोशन धरती सारी है। समुन्‍द्र में सूर्य की छवी बडी ही प्‍यारी है। हरियाली को देख मन होता बडा ही चंचल पक्षीयों मे बुलबुल …

शब्‍द

***************************************************** शब्‍दों में छुपा रहता अमृत सा ज्ञान है। उत्कर्ष शब्‍दों से ही लेखनी का मान है। सरल भाव रचना में लाते निखार तो, शब्‍दों के संगम से व्‍यक्‍ति …

प्रेम विराग

दुर्बल होता ही जाये ये मन उनके विराग में रात दिन जलता ही जाये मन प्रेम के चिराग में अन्‍धकार की पीड़ा ना सह पाऊँ है चांदनी रात प्रतिक्षा …

प्रेम अनुराग

सुन्‍दर रूप प्रेम अनुराग से हर लिया मेरा मन है बदला मौसम खिल गये नैना हुआ उनका आगमन है चंचल करती उसकी मधुर बोली हूँ सुनने को आतुर दूर …