Category: अभिषेक राजहंस

तुम मामूली हो, मामूली बन कर रहो ना

गड़े मुर्दे मत उखाड़ो यारो कुछ लोगो की सुकून की नींद क्यों गायब करना चाहते हो तुम मामूली हो , मामूली बन कर रहो ना ये तो खेल है …

मेरे देश की औरते

औरते मेरे देश की औरते बड़ी विचित्रता का बोध कराती है अपने आत्मसम्मान की चिंता किये बिना सब कुछ करती जाती है वो बस सबसे प्रेम करती जाती है …

मेरा गांव बदल रहा है

मेरा गांव अब बदल रहा है थोड़ा-थोड़ा सा शहर हो रहा है काका ,मामा, फूफा -फूफी अंकल-आंटी हो रहे हैं गुड़ के ढेलियों की जगह कुरकुरे-मैग्गी ले रहे हैं …

मैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँ

मैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँ अभावो की गोद में पला हूँ दिन के उजाले को जीने के लिए रात-रात भर जागना चाहता हूँ अब आईने में खड़ा …

भूल जाना जरूरी होता है

कभी-कभी खुद को फैलाने के लिए अपने अतीत को समेटना जरूरी होता है जलते हुए आग से राख तो निकलेंगे हीं उन राखो से अपने हाथ बचाना जरूरी होता …

तुम्हारे न होने से

शीर्षक-तुम्हारे न होने से तुम्हारे न होने से कुछ भी पूरा नही होता बाजुएं सोती है अकेली उन बाजूओं को तुम्हारा इल्म नहीं रहता राते लगती है काली-काली उन …