Category: आग्नेय

डसने के पहले

यद्यपि उसने डसने से पहले कई रंग बदले वह गिरगिट नहीं था बदलते रंगों का यह परिवर्तन सिर्फ़ प्रकृति की माया नहीं थी उसकी आत्मा भी भूरी मटमैली और …

सिर्फ़ प्रतीक्षा

कहीं कोई सूखा पेड़ फिर हरा हो गया। कहीं कोई बादलों पर फिर इन्द्रधनुष लिख गया। कहीं कोई शाम का सूरज फिर डूब गया। हम भुतही पुलियों पर पतलूनों …

शिखर पर बौने

नहीं ले सका दीमक से उसका विध्वंस मधुमक्खियों से उनका रस तितलियों से उनका रंग चींटियों से उनका गौरव नहीं ले सका सर्वहारा से उनका साहस मित्रों से उनकी …

अंत में मैं ही हँसूंगा

अंत में मैं ही हँसूंगा सर्वप्रथम मैं ही रहूंगा अन्तिम होने पर भी राख की ढेरी होते हुए भी ज्वालामुखी-सा धधकूंगा काफ़्का का किला होकर भी खुले हुए आँगन …

कहाँ हैं वे मेरी कविताएँ

कहाँ गई वे मेरी कविताएँ क़िताबों के पन्नों में दबा दी गई थीं जो मेरी कविताएँ जो छपने वाली थीं क़िताबों में जिनके लिए सन्तापों की गठरी सिर पर …

मेरा घर, उसका घर

एक चिड़िया प्रतिदिन मेरे घर आती है जानता नहीं हूँ उसका नाम सिर्फ़ पहचानता हूँ उसको वह चहचहाती है देर तक ढूँढती है दाने : और फिर उड़ जाती है …

कल

सीना तानकर चलता हूँ दिन-रात गजराज की तरह झूमता हूँ सड़कों पर अपने मित्रों और शत्रुओं के समक्ष दम्भ से भरी रहती है मेरी मुखाकृति–मेरी वाणी अलस्स सवेरे गुज़रता …

रतजगा

मुझे जागते रहना है– एक कथा और सुनाओ ख़त्म हो जाए तो और कथाएँ सुनाओ समुद्र में रहने वाली मछलियों साइबेरिया से आने वाली बत्तखों बब्बर शेर, चालक लोमड़ी, …

प्रस्थान

तुम्हें आख़िरकार देख रहा हूँ तुम्हारी आँखों में गुज़रे वक़्त के आँसू हैं मैं तुम्हें हमेशा के लिए छोड़कर जाने वाला हूँ यकायक देखता हूँ तुम्हारे पीछे खड़ी एक …

प्रतिध्वनि

देखना एक दिन इस तरह चला जाऊंगा ढूंढोगी तो दिखूंगा नहीं लौटता रहा हूँ बार-बार प्रतिध्वनि बनकर तुम्हारे जीवन में देखना एक दिन इस तरह चला जाऊंगा लौट नहीं …