Category: Kavita

आँसू छंद “कल और आज”

भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में। तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में। बल पे विपुल ज्ञान के ही, जग पर शासन फैलाया। …

अहीर छंद “प्रदूषण”

अहीर छंद “प्रदूषण” बढ़ा प्रदूषण जोर। इसका कहीं न छोर।। संकट ये अति घोर। मचा चतुर्दिक शोर।। यह दावानल आग। हम सब पर यह दाग।। जाओ मानव जाग। छोड़ो …

अभिनन्दन

अभिनन्दन अभिनन्दन है, अभिनन्दन, अभिनन्दन है, अभिनन्दन। साहस की इस बेला पर करते, हम सब जन मिलकर वंदन।। सोभाग्य अपना है ये कि, आप हमारे बीच पधारे। नहीं बता …

“जागो भाग्य विधाताओं”

“जागो भाग्य विधाताओं” देखा अजब तमाशा, छायी दिल में निराशा, चार गीदड़ ले गये, मूँछ तेरी नोच के। सोये हुए शेर तुम, भूतकाल में हो गुम, पुरखों पे नाचते …

कुछ समझ जाते हैं कुछ समझ नहीं पाते

तेरी नाराजगी,मेरे अल्फ़ाज़ भी नहीं मिटा पाते हम चाहते हैं कितना तुझको यह मेरे आंसू भी नहीं बता पाते घड़ी घड़ी रह रह कर देखता हूं मैं उन्हीं बीरान …

एक सख्स

एक सख्स है जो नाराज भी नहीं है मगर पहले जैसा भी नहीं है गुमसुम सा है कुछ कहता भी नहीं है मैं पूछूं भी तो क्या पूछूं उससे …

सार छंद (पलाश और नेता)

सार छंद (पलाश और नेता) छन्न पकैया छन्न पकैया, टेसू सा ये नेता। सूखी उलझी डालों सा दिल, किसका भी न चहेता।। पाँच साल तक आँसू देता, इसका पतझड़ …

— भावना —

भावों के कोरे कागज पर सूख गये है नयनों के रंग भावनाओं के उड़ते पाखी सतरंगी पाँखों से आखर आकर कब लिख जाओगे ? जी भर भाव बरसे आंगन …

सरहदी मधुशाला

सरहदी मधुशाला मधुशाला छंद (रुबाई) रख नापाक इरादे उसने, सरहद करदी मधुशाला। रोज करे वो टुच्ची हरकत, नफरत की पी कर हाला। उठो देश के मतवालों तुम, काली बन …

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति”

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति” परहित कर विषपान, महादेव जग के बने। सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना नित करें।। माथ नवा जयकार, मधुर स्तोत्र गा जो करें। भरें सदा भंडार, …

सपनो के शहर में आज धुंआ है|

कभी सिर्फ केमिस्ट्री लैब में सूंघी थी, आज हवा में सूंघता हूँ, हर पांच मील पर सल्फर, चार मील पर सोडियम और तीन मील पर अमोनिया है, सीमेंट घुली …

बारूद का ढेर

बारूद का ढेर 💣💣💣💣 जनसंख्या बनी बारूद का ढेर। संभालो कहीं ना हो जाए देर। तीन प्रतिशत मात्र भूमि का हिस्सा । सत्रह प्रतिशत जनता का किस्सा । संसाधनों …

सच्ची सफलता

निचली डाल के वो फल।। अंजुली में भरा ये जल।। देते सफलता का भास।। कि अब मिट जाएगी भूख। कि अब मिट जाएगी प्यास।। पर क्षणिक है यह उल्लास …

अनोखी राखी

सुनहरी किरणों की ओड़ चुनरिया। सुंदर रूप प्रकृति ने सजा लिया। केसर के पुष्पों में नदियों के जल से दे छींटे सिंदूरी तिलक तैयार किया। लगा कर अरुण तिलक …