Category: Kavita

शिक्षा, शिक्षा नहीं रही।

शिक्षा, शिक्षा रहीं नहीं, व्यापार बना अब डाला है। मंदिर कहलाता था विद्यालय, अब वहाँ स्वार्थ ने बागडोर संभाला है। व्यवहारिक शिक्षा का पतन हुआ, संस्कार जीवन में कैसे …

कविता की जंगल

लिखी गई है बहुत सी कवितायेँ पहले बहुत सारी जगहों पर अनेक विषयों पर देश और विदेशों में भी लिखी जाएगी बहुत सी कवितायेँ वहां जहाँ लिखी नहीं गई …

मेरी Cigarette

आधी से थोड़ी ज्यादा, पूरी से थोड़ी कम; आज मेरी Cigarette ने, बाँटे मुझसे उसके गम।   जीतने इल्जाम हमने  उसपे लगाए, उतने ही सवाल उसने आज पूछे; अब …

धर्म

धर्म —————————–‘ जिस पल पसीजे, तेरा दिल जिस पल पसीजे, तेरा ज़मीर जिस पल पसीजे, तेरी आत्मा उस पल-उस पल- उस पल को ऐ! इंसा ,थाम ले-पकड़ ले मत …

क्या लिखूं…..क्या लिखूं…..क्या लिखूं…..

क्या लिखूं मन की कहानी लिखूं या आँखों का पानी लिखूं क्या लिखूं तितलियो का शरमाना लिखूं या भँवरो का गुनगुनाना लिखूं क्या लिखूं हवाओ की झनकार लिखूं या …

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।

हम तुम्हारे प्रेम में खुद को भुलाये बैठे है  प्रतीक्षा में चौखट पर नयन टिकाये बैठे है  ह्दय के पटल पर तुम्हारी छवि बसाये बैठे है  प्रियवर हम तुम्हे …

मेरी हिन्दी प्यारी

मेरी हिंदी प्यारी ——————– माँ ने सिखाई अध्यापकों ने सुधारी मन की बात कहने में समर्थ मेरी दादी की प्यारी । खुशबूदार फूलों की क्यारी ।। ऐसी है मेरी …

मैं रोज लगाता हूँ एक साँकल अपने ख्वाबों की दुनिया पर… फिर भी जाने कैसे किवाड़ खुले मिलते हैं… बेशक चरमराने की आवाज़ रोज होती है वाकिफ और कर देता हूँ बंद हर दरवाज़े …

ख्वाहिश

यूं तिनकों सी बिखरी मेरी ख्वाहिश खूबसूरत रात की दास्ताँ कहती है तेरे जाने के बाद भी पहरों तक मेरे लबों पे इक जुम्बिश रहती है केशुओं में तेरी …

सुनो चाँद, कल ना…. काला टीका लगा कर आना

बारिश में न रात जल्दी आ जाया करती है दुकान से घर लौटते वक़्त अँधेरा हो जाता है सड़क पर चारो तरफ भीड़ … ट्रैफिक का शोर…. तकरीबन पन्द्रह …

~~ प्रेम ~~

समय की सिलवटों में मेरे प्यार की सीवन नहीं उधड़ी है समय-समय पर मिल कर हम ने उसकी सिलाई पक्की की है। फर्क बस इतना है कि उसे जताने …

शायद…..

शायद इस जिंदगी में एक ऐसा दिन भी आएगा जब हम एक दूसरे के साथ हँस सकेंगे कुछ पुराने किस्से याद करके मैं तुम्हें चिढ़ा सकूंगा कुछ पुराने गाने …

कविता क्या है ? (मुक्ता शर्मा)

कविता क्या है? विचारों की रेल भावनाओं के डिब्बे और शब्दों का सार्थक खेल लौकिक से आलौकिक तक सच्चाई की जमीन  हो तो क्या कमाल है कविता इस अनुसंधान …

कौआ और गिद्ध (मुक्ता शर्मा)

                कौआ और गिद्ध निर्जीव का माँस नोचने वाले दुर्गंध में जीने वाले                                  एक जैसे,पर दिखने में अलग.                     देखो गिद्ध और कौआ …

जन्मदिन

समय रुकता नही, चलता लगातार, टिक-टिक करता, पल-पल अौर बारबार। लो आया जन्मदिन तेरा, फिर एक बार, मेरे लिये जैसे है ये, एक पारिवारिक त्योहार, अभिनंदन, आशीष बधाइयाँ, मिलती …