Category: Kavita

सार छंद (पलाश और नेता)

सार छंद (पलाश और नेता) छन्न पकैया छन्न पकैया, टेसू सा ये नेता। सूखी उलझी डालों सा दिल, किसका भी न चहेता।। पाँच साल तक आँसू देता, इसका पतझड़ …

— भावना —

भावों के कोरे कागज पर सूख गये है नयनों के रंग भावनाओं के उड़ते पाखी सतरंगी पाँखों से आखर आकर कब लिख जाओगे ? जी भर भाव बरसे आंगन …

सरहदी मधुशाला

सरहदी मधुशाला मधुशाला छंद (रुबाई) रख नापाक इरादे उसने, सरहद करदी मधुशाला। रोज करे वो टुच्ची हरकत, नफरत की पी कर हाला। उठो देश के मतवालों तुम, काली बन …

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति”

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति” परहित कर विषपान, महादेव जग के बने। सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना नित करें।। माथ नवा जयकार, मधुर स्तोत्र गा जो करें। भरें सदा भंडार, …

सपनो के शहर में आज धुंआ है|

कभी सिर्फ केमिस्ट्री लैब में सूंघी थी, आज हवा में सूंघता हूँ, हर पांच मील पर सल्फर, चार मील पर सोडियम और तीन मील पर अमोनिया है, सीमेंट घुली …

बारूद का ढेर

बारूद का ढेर 💣💣💣💣 जनसंख्या बनी बारूद का ढेर। संभालो कहीं ना हो जाए देर। तीन प्रतिशत मात्र भूमि का हिस्सा । सत्रह प्रतिशत जनता का किस्सा । संसाधनों …

सच्ची सफलता

निचली डाल के वो फल।। अंजुली में भरा ये जल।। देते सफलता का भास।। कि अब मिट जाएगी भूख। कि अब मिट जाएगी प्यास।। पर क्षणिक है यह उल्लास …

अनोखी राखी

सुनहरी किरणों की ओड़ चुनरिया। सुंदर रूप प्रकृति ने सजा लिया। केसर के पुष्पों में नदियों के जल से दे छींटे सिंदूरी तिलक तैयार किया। लगा कर अरुण तिलक …

शिक्षा, शिक्षा नहीं रही।

शिक्षा, शिक्षा रहीं नहीं, व्यापार बना अब डाला है। मंदिर कहलाता था विद्यालय, अब वहाँ स्वार्थ ने बागडोर संभाला है। व्यवहारिक शिक्षा का पतन हुआ, संस्कार जीवन में कैसे …

कविता की जंगल

लिखी गई है बहुत सी कवितायेँ पहले बहुत सारी जगहों पर अनेक विषयों पर देश और विदेशों में भी लिखी जाएगी बहुत सी कवितायेँ वहां जहाँ लिखी नहीं गई …

मेरी Cigarette

आधी से थोड़ी ज्यादा, पूरी से थोड़ी कम; आज मेरी Cigarette ने, बाँटे मुझसे उसके गम।   जीतने इल्जाम हमने  उसपे लगाए, उतने ही सवाल उसने आज पूछे; अब …

धर्म

धर्म —————————–‘ जिस पल पसीजे, तेरा दिल जिस पल पसीजे, तेरा ज़मीर जिस पल पसीजे, तेरी आत्मा उस पल-उस पल- उस पल को ऐ! इंसा ,थाम ले-पकड़ ले मत …

क्या लिखूं…..क्या लिखूं…..क्या लिखूं…..

क्या लिखूं मन की कहानी लिखूं या आँखों का पानी लिखूं क्या लिखूं तितलियो का शरमाना लिखूं या भँवरो का गुनगुनाना लिखूं क्या लिखूं हवाओ की झनकार लिखूं या …

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।

हम तुम्हारे प्रेम में खुद को भुलाये बैठे है  प्रतीक्षा में चौखट पर नयन टिकाये बैठे है  ह्दय के पटल पर तुम्हारी छवि बसाये बैठे है  प्रियवर हम तुम्हे …

मेरी हिन्दी प्यारी

मेरी हिंदी प्यारी ——————– माँ ने सिखाई अध्यापकों ने सुधारी मन की बात कहने में समर्थ मेरी दादी की प्यारी । खुशबूदार फूलों की क्यारी ।। ऐसी है मेरी …