Tag: www.bhorabhivyakti.tk

आहिस्ता

तेरी ख़ातिर आहिस्ता, शायद क़ामिल हो जाऊँगा। या शायद बिखरा-बिखरा, सब में शामिल हो जाऊँगा॥ शमा पिघलती जाती है, जब वो यादों में आती है। शायद सम्मुख आएगी, जब …