Tag: वसंत ऋतु कविता

बसंत पर कविता

प्रकृति ने धरती का सृंगार किया बहुरंगे फूलों के संग शोभित करके अनुपम छबि से भर कर हर तरु मैं नव जीवन रंग सुरभित पुष्पित हुई द्रुमदिक लता | …

आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं

आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं   नजरो को सकते वोह बेताब बैठे हैं   कोई उलझन है मन में तोह पूछ लूं   लेकिन उनकी आँखों …

आई शुभ वसंत / शिवदीन राम जोशी

आनन्द-उमंग रंग, भक्ति-रंग रंग रंगी, एहो ! अनुराग सत्य उर में जगावनी | ज्ञान वैराग्य वृक्ष लता पता चारों फल, प्रेम पुष्प वाटिका सुन्दर सजवानी | सत्संगी समझदार, देखो …

बसन्त पंचमी पर निराला-स्मृति

था यहाँ बहुत एकान्त, बंधु नीरव रजनी-सा शान्त, बंधु दुःख की बदली-सा क्लान्त, बंधु नौका-विहार दिग्भ्रान्त, बंधु ! तुम ले आये जलती मशाल उर्जस्वित स्वर देदीप्य भाल हे ! कविता के …