Tag: शृंगार

जालिम अदाएं – शिशिर “मधुकर”

तेरी खूबसूरत ये जालिम अदाएं पल पल मुझको इतना लुभाए मानो किसी गुल के महके बदन से भँवरा कोई जैसे लिपटा ही जाए. तुझे देखूँ जब भी मुझे लगता …

मुखड़ा या चाँद का टुकड़ा

मुखड़ा कहु या चाँद का टुकड़ा चेहरा तेरा ताज भी शर्माता है देख हुस्न नायब तेरा चाँद भी छुपजाता बादलो में देख हुस्न तेरा कही भूल से हो जाए …

आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं

आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं   नजरो को सकते वोह बेताब बैठे हैं   कोई उलझन है मन में तोह पूछ लूं   लेकिन उनकी आँखों …

प्रिय अगर मै रूठ जाऊं

प्रिय अगर मै रूठ जाऊं, प्यार से मुझको मनाना | जो कभी भटकूँ दिशा से, रास्ता मुझको दिखाना || रात कितनी भी बड़ी हो, चेतना मद्धिम पड़ी हो | …

मोरे कान्हा ले चलो मोहे पार

मोरे कान्हा ले चलो मोहे पार, मै हूँ कब से खड़ा रे तोरे द्वार ।। माया भ्रम की मोरी गगरिया, मारो कान्हा तान कंकरिया। अंग अंग मोरा भीगे ऐसे, …

मेरे ह्रदय में समाई

तुमने ली जब मद-मस्त अंगढ़ाई… हृदय के रुधिर वेग मे फ़ैली पंचम तान अंग -अंग मे शिहरित ओस का स्नान पुष्प सा पुष्पित हिल्लोरित प्राण प्रसन्नता की स्रोत बही …

मिलन की परिभाष

भोर की लाली छाई,स्वर्णिम आभा का प्रकाश, ली तुमने अब अंगड़ाई,अधखुली नींद का आभास, यह उलझे बालों की लटे, मनमें महके सुवास मिलन के मधुरिम पल, चाहत में चातक …

मिलन

घनगोर कालि अमबश्या की रात चांदनी को प्रतीक्षित है नई प्रभात हर्षित मन, मन मैं मधुमास भरा उल्लास, मिलन की आश दिन प्रतिदिन घटेगी कालिमा की लेश पक्षकाल मैं …