Tag: शेरो शायरी

इंसानियत की सीमा – डी के निवातिया

इंसानियत की सीमा — सोया हुआ है सिंह, सियार दहाड़ मार रहा है छल-कपट की लड़ाई में शूरवीर हार रहा है जाने किस करवट बैठेगा हैवानियत का ऊँट इंसानियत …

मुहब्बत का असर – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की ख़ुशबू जब मेरी सांसों में रहती थी मेरा चेहरा चमकता था खुशी नस नस में बहती थी सभी ग़म भूल कर यारों सदा जीने की इच्छा …

गुल ना खिलाते हो – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से तुम अब अपनी नज़रें ना मिलाते हो कली ही नोच देते हो कभी गुल ना खिलाते हो कभी सुख देने की खातिर भरा था चेहरा हाथों …

बुलबुल-ऐ-चमन – डी के निवातिया

बुलबुल-ऐ-चमन * कफ़स-ऐ-क़ज़ा में कैद बुलबुल-ऐ-चमन अपना है बनाएंगे जन्नत-ऐ-शहर इसे लगे बस ये सपना है फ़िक्र किसे मशरूफ सब अपनी बिसात बिछाने में नियत में ,राम-राम जपना पराया …

मुहब्बत और पूजा – शिशिर मधुकर

तूने सौंपा मुझे सब कुछ अहम दिल से मिटाया है मेरे हर क़तरे क़तरे में नाम तेरा समाया है मुहब्बत और पूजा में फर्क कोई नहीँ होता इन्हीं के …

ज़रा खुलने तो दो — डी के निवातिया

ज़रा खुलने तो दो *** शेर सारे पढ़े जायेंगे तुम्हारे मतलब के ज़रा खुलने तो दो बाते तमाम होंगी वफ़ा संग बेवफाई की ज़रा घुलने तो दो !! हर …

अधूरे से – शिशिर मधुकर

अधूरे से दिखे मुझको तुम्हें कल शाम को देखा बिना सिय के तड़पते जैसे अकेले राम को देखा सभी गोपी कृष्ण को घेर कर उल्लास करती थी मगर राधा …

बचाना भी है — डी के निवातिया

आँगन — फूलों और कलियों से आँगन सजाना भी है, कीचड और काँटों से दामन बचाना भी है, महकेगा चमन-ऐ- गुलिस्तां अपना तभी, हर मौसम की गर्दिश से इसे …

आईने की छवि- शिशिर मधुकर

मुहब्बत ग़र समझता वो तो यूँ रूठा नहीं होता अलि के चूम लेने से फूल झूठा नहीं होता ना संग जाएगा कुछ तेरे ना संग जाएगा कुछ मेरे समझता …

यथासंभव — डी के निवातिया

यथासंभव — रक्षक,दक्षक,शिक्षक,भिक्षक सब दाम में बिकता है खरीददार अगर पक्का है तो सब कुछ मिलता है कौन कहता है सच कभी झूठा नहीं हो सकता कलयुग में तो …

मुहब्बत का सरूर – शिशिर मधुकर

देख के मन लगे गर किसी को पाने में हो गई उस से मुहब्बत तुम्हें ज़माने में अकेले तुम रहोगे बीच में जो लोगों के तन्हा खुद को नहीं …

धैर्य की परीक्षा – डी के निवातिया

    धैर्य की परीक्षा *** अब न खाली हो किसी माँ की गोद, कोई लाल अब न फ़ना हो कब तक देनी होगी धैर्य की परीक्षा, अब कोई …

बेरुखी -डी के निवातिया

बेरुखी *** करके बेवफाई, खुद को, नज़रें मिलाने के काबिल समझते हो बात बात पर देकर दुहाई मुहब्बत कि, हम ही से उलझते हो कहाँ से सीखा हुनर, इश्क …

मंजर – डी के निवातिया

मंजर *** हर मंजर से गुजर रहे है कुछ लोग, सियासत में अपना रूतबा जमाने को ! न जाने कितने गुलाब मसल डाले, फकत अपने नाम का गुल खिलाने …

घटाएं प्यार की- शिशिर मधुकर

प्यार जब दिल में होता है तो आँखों से झलकता है यार ग़र सामने हो सांसों में शोला दहकता है मुहब्बत ज़िन्दगी में फूलों की खुशबू के जैसी है …

सगा – डी के निवातिया

सगा *** वो न मेरा, न तेरा, न इसका, न उसका सगा था सैलाब हैवानियत का उसके जहन में जगा था ! परवाह कब थी उसने दुनिया में इंसानियत …

सभी मतलब के रिश्ते हैं – शिशिर मधुकर

तुम्हारे प्यार की खातिर अदावत मोल ली मैंने ग़मों की पोटली खुद के लिए ही खोल ली मैंने मुझे मालूम था ये आंधियां घर को उजाड़ेंगी ना जाने क्या …

तेरे नाम – डी के निवातिया

तेरे नाम — सोचता हूँ एक ग़ज़ल तेरे नाम लिख दूँ राज़-ऐ-दिल मुहब्बत के तमाम लिख दूँ उठे गर नजरे तो रोशन ऐ आफताब कहें ज़रा झुके जो पलकें, …

यही बस देखा है मैंने तो- शिशिर मधुकर

मुहब्बत जब किसी से करके मैंने सपने सजाए हैं तूफानों ने सदा आकर मेरे दीपक बुझाए हैं भले ही कोई अपनी बात से कितना भी मुकरा हो मैंने वादे …

हम ही दुष्ट हो गए – डी के निवातिया

हम ही दुष्ट हो गए *** यार तमाम अपने अब रुष्ट हो गए करके माल हज़म हष्ट-पुष्ट हो गए हमने उन्हें ज़रा सा क्या रोका टोका नजरो में उनकी …