Tag: शेरो शायरी

ठीक नहीं – डी के निवातिया

ठीक नहीं *** बात दिल की दिल में छुपाना ठीक नहीं ! फ़ासले अपनों के बीच बनाना ठीक नहीं ! जिंदगी में रक्खो अपने काम से काम यारो ! …

ख़ुश-हाल, ख़ुश-हाली—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

((1.) इक दिया नाम का ख़ुश–हाली के उस के जलते ही ये मालूम हुआ —कैफ़ी आज़मी (2.) ना–शनास–ए–रू–ए–ख़ुश–हाली है तब–ए–ग़म–नसीब जब मसर्रत सामने आई झिजक कर रह गई —साक़िब …

मेरे दिल क्यूँ मचलता है-शिशिर मधुकर

मेरे दिल क्यूँ मचलता है तुझे तन्हा ही चलना है आग अपने लगाते हैं तो फिर जलना ही जलना है हिम से खुद को ढके देखो वो पर्वत मुस्कुराता …

कभी तुम दूर ना जाओ – शिशिर मधुकर

तेरी फुरकत में तड़पा हूँ मेरी बाहों में आ जाओ मेरे सपनों को सच कर दो निगाहों में छा जाओ बड़ी मुद्दत हुई संगीत जीवन से हुआ रुखसत गीत …

बद-गुमानी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) आपस में हुई जो बद–गुमानी मुश्किल है निबाह दोस्ती का —हफ़ीज़ जौनपुरी (2.) तुम रहे पाक–साफ़ दिल हर दम मैं रहा सिर्फ़ बद–गुमानी में —महावीर उत्तरांचली (3.) हिफ़ाज़त …

रिश्तों की जटिलता है – शिशिर मधुकर

तेरी बोली जो सुनता हूँ सुकूं कानो को मिलता है कमल मेरे हृदय का देखो तो इतरा के खिलता है बात आगे ज्यों बढ़ती है पवन सी चलने लगती …

रोटियाँ—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) डाल दीं भूके को जिस में रोटियाँ वह समझ पूजा की थाली हो गई —नीरज गोस्वामी (2.) है मुश्किल दौर सूखी रोटियाँ भी दूर हैं हम से मज़े …

पायल – डी के निवातिया

“पायल” *** तुम जितना धीरे चलती हो, पायल उतना शोर करती है ! धड़कने दिल कि बहक जाती है, ये गज़ब का जोर करती है !! रह-रहकर यूँ सताती …

तकलीफ़—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) शहर में है इक ऐसी हस्ती जिस को मिरी तकलीफ़ बड़ी है —राजेन्द्र नाथ रहबर (2.) बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते यही उपहार देते रोज़ अपने —महावीर …

किरदार—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) इस के सिवा अब और तो पहचान कुछ नहीं जाऊँ कहाँ मैं अपना ये किरदार छोड़ कर —भारत भूषण पन्त (2.) व्यवस्था कष्टकारी क्यूँ न हो किरदार ऐसा …

निशानी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) दास्ताँ–गो की निशानी कोई रक्खी है कि वो दास्ताँ–गोई के दौरान कहाँ जाता है —शाहीन अब्बास (2.) उन की उल्फ़त में ये मिला हम को ज़ख़्म पाए हैं …

खेल—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) इस का छुपाना खेल नहीं है राज़ और वो भी उन का राज़ —मोहम्मद मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा (2.) खेल में भावना है ज़िंदा तो फ़र्क़ कुछ हार से …

तेरी शह नहीं पाते – शिशिर मधुकर

मुहब्बत तुमसे है इतनी तेरे बिन रह नहीं पाते बात दिल में हज़ारों हैं मगर हम कह नहीं पाते ज़माने ने किया मज़बूर न हों नज़दीकियां तुम से मगर …

“उग”–”उगाते”—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) ये वही गाँव हैं फ़सलें जो उगाते थे कभी भूक ले आई है इन को तो नगर में रख लो —प्रेम भण्डारी (2.) हम साँप पकड़ लेते हैं …

“बज”–”बजाते”—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) याद इक हीर की सताती है बाँसुरी जब कभी बजाते हैं —मुमताज़ राशिद (2.) कभू करते हो झाँझ आ हम से कभी झाँझ और दफ़ बजाते हो —मिर्ज़ा …

लपेटे—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) कफ़न से मुँह लपेटे मेरी हसरत दिल-ए-वीराँ के कोने में पड़ी है —बयान मेरठी (2.) उस पे कल रोटियाँ लपेटे सब कुछ भी अख़बार से नहीं होता —महावीर …

ना होते फिर ये वीराने -शिशिर मधुकर

कहो किसको सुनाएं हम मुहब्बत के वो अफ़सानें यहाँ अपना पराया कौन है अब तक ना पहचाने सदा बदनाम होते हैं झूठ वो कह नहीं सकते सबको खुद सा …

तड़प सीने में होती है – शिशिर मधुकर

चोट खा के समझ आया कितने बेईमान चेहरे हैं पीर मिटती नहीं मन की घाव कुछ इतने गहरे हैं सुकूं हम ढूढ़ने को उसके सीने से लगें कैसे बड़ी …

कभी सोचा करो- शिशिर मधुकर

कभी सोचा करो मालिक ने हमको क्यों मिलाया है बियाबान ज़िन्दगी में फूलों को फिर से खिलाया है प्यास बुझती नहीं अब तो कसक बढ़ती ही जाती है जाम …

जब दिल में मुहब्बत होती है- शिशिर मधुकर

जब दिल में मुहब्बत होती है नज़रों से बोला करती है मुँह से निकली हर बात भी तब राज़ों को खोला करती है जब फूल जुबां से झरते हैं …

ख़ुद्दार—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) तबीअत इस तरफ़ ख़ुद्दार भी है उधर नाज़ुक मिज़ाज–ए–यार भी है —जिगर मुरादाबादी (2.) नहीं टूटे कभी जो मुश्किलों से बहुत ख़ुद्दार हम ने लोग देखे —महावीर उत्तरांचली …

गीत वो फिर से गा जाओ – शिशिर मधुकर

देखो बादल बरसते हैं चलो अब तुम भी आ जाओ गुलाबों की महक बन के मेरी दुनिया में छा जाओ वो कसमें और वादे हमनें किए जो एक दूजे …

मुकाम बाकी है – डी के निवातिया

मुकाम बाकी है *** अभी तो बहुत से काम बाकी है जोड़ना नाम संग नाम बाकी है ! अपने हौसलों को ज़रा उड़ान दे अभी पाने कई मुकाम बाकी …