Tag: शेरो शायरी

हमारे नेता—डी के निवातिया

विकास की डोर थाम ली है हमारे नेताओ ने । अब नये शमशान और कब्रिस्तान बनायेंगे।। कही भूल न जाओ तुम लोग मजहब की बाते याद रखना इंसानियत को …

एहसास ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहें हम तुमको कितना याद करते हैं एहसास ए मुहब्बत क्या कभी चाहने से मरते हैं गमों की खाई से तुमने ही तो हमको निकाला था तुम्हारा …

मेरे घर में मेरे सिवा कोई………~Gursevak singh pawar jakhal

मेरे घर में मेरे सिवा कोई समझाने वाला नही था, मैं गर सो जाता तो कोई जगाने वाला नही था !! गमो के खंजर लगे थे सीने से मेरे …

उल्फ़त का नूर – शिशिर मधुकर

गुल तेरी मुहब्बत के खिलकर के झर गए मौसम बसंत के भी सब आकर गुज़र गए खुशबू दिलों दिमाग से तो मिट ना पाएगी भंवरे खुश है रस पीकर …

माथे का कुमकुम – शिशिर मधुकर

मेरी जिंदगी में सब कुछ छोड़ कर गर जो आते तुम तुम्हारे मरमरी चेहरे की मय पी मैं रहता नशे में गुम बड़ा वीराना रहता है मेरी मुहब्बतों का …

नूर फिर से लौटा है – शिशिर मधुकर

प्यार ही प्यार था तेरी इन हंसी निगाहों में मैं खुद को भूल गया तूने भरा जो बाहों में जिंदगी में हर ईक चीज तुमको मिल जाए खुशी मिलती …

चालाकी से गहते हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत को भुला दें हम वो हमसे ये कहते हैं दर्द का क्या पता उनको जो ना चोट सहते हैं ईंट गारे का घर भी तोड़ना आसां ना होता …

प्रीत का रंग – शिशिर मधुकर

हाथ छूटे हैं जीवन में मगर बंधन तो नहीं टूटे दूरीयां चाहे हों जैसी ना तुम रूठे ना हम रूठे समय का फेर है सारा इसका क्या करे कोई …

तेरी खुशबू से -शिशिर मधुकर

तेरी खुशबू से हम तुझको यहाँ पहचान ही लेंगे तू आई है हवाओं के रुख से ये भी जान ही लेंगे सरद मौसम ज्यों बीतेगा नरम सी धूप बिखरेगी …

मुँह जो फेरा है – शिशिर मधुकर

अपने हर अंश में तुम झाँक लो मेरा बसेरा है वक्त के साथ में छंट जाएगा जो भी अँधेरा है तुम्हे पाना मेरे लिए बस कुदरत की मर्जी थी …

ग़रीब की बेटी (विवेक बिजनोरी)

  “मुझको इस काबिल बनाया, खुद भूखे प्यासे रहकर, मेरे बाबा ने मुझको समझा है सबसे बेहतर। मैं ग़रीब की बेटी अपने बाबा का सम्मान करूँ, माफ़ करना हे …

सुनो ……शेरो शायरी—-डी. के निवातिया

सुनो, कुछ नही है तो यादो में आते क्यों हो पल – पल ख्यालो में आकर सताते क्यों हो न किस्मत अपनी, न जिगर तुममे इतना फिर सपने दीद …

जज्बा मुहब्बत का – शिशिर मधुकर

तेरा भरोसा आज भी खुलकर ये कहता है जज्बा मुहब्बत का तेरी रग रग में रहता है इन दुनियाँ वालों नें जब मुँह पर जड़े ताले दिल की बातें …

गुमसुम—डी. के. निवातिया

कुछ तो बात है जो गुमसुम हो, राज-ए-दिल कभी खोला करो, दिल ऐ हालात नही तो न सही, अपने लबो से तो कुछ बोला करो… !! ! ! डी. …

परिवर्तन – शिशिर मधुकर

मुझको यकीं हैं अपने खुदा पे वो लम्हा भी आएगा अपने दिल में बसा के मेरी छवि कोई मुस्कुराऐगा फूल खिलते हैं ऋतुओं में कभी मन की नही होती …

तृष्णा – शिशिर मधुकर

जो जगह मुझको दी तूने वहाँ किसको बसाया है मेरी आँखों में तो अब तक तेरा मुखड़ा समाया है मैं जन्मों का प्यासा हूँ तू जीवन दायिनी सुरसरिता अपनी …

बन्धन – शिशिर मधुकर

वो बन्धन जिनमें प्रेम ना हो होते हैं जहरीले तोड़े बिन उन सबको यहाँ कैसे कोई जी ले अन्दर छुपी हस्ती से ही तो आती है सुंदरता झूठे फरेबी …