Tag: शेरो शायरी

रोमांच — डी के निवातिया

रोमांच बदन संगमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे है तपता कनक आंच सा नजर है की उसके उत्कृष्ट बदन पर ठहरती …

बदलते वक्त में -शिशिर मधुकर

क्या करूँ मैं तुम ही बोलो मेरा दिल तुमने तोड़ा है कहाँ ढूँढू सकूँ जब तेरे लिए ज़माने भर को छोड़ा है धारा रोक देने से नदिया घुट घुट …

बदन संगेमरमर — डी के निवातिया

बदन संगेमरमर बदन संगेमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे तपता कनक आंच सा नजर है की उस उत्कृष्ट जिस्म पर ठहरती …

एक नजर — डी के निवातिया

***एक नजर *** बुझती नहीं प्यास साकी अब सिर्फ जाम से दिल झूमने लगता है सूरज ढलते ही शाम से फकत एक नजर जी भर के देख लेने दो …

जिंदगी वीरान है- शिशिर मधुकर

तूने दिल से क्या रुखसत किया जिंदगी वीरान है सांसें बदन में तो चल रहीं बाकी ना कोई जान है लाखों जतन मैंने किए तुझे याद करना छोड़ दूँ …

सावन के बदरा — डी के निवातिया

सावन के बदरा ये सावन के बदरा भी बड़े निगोड़े है, मेरे दिलबर की तरह ! रोज़ उमड़ उमड़ आते है, बिन बरसे पास से गुज़र जाते है !! ! …

दिल टूटने का खेल – शिशिर मधुकर

तुम्हारा हाथ क्या पकड़ा ज़माना भर खफा हुआ ना मुहब्बत मिली मुझको ना ही कोई नफ़ा हुआ यूँ तो पहले भी मेरी ज़िन्दगी में रब ना था कोई मगर …

अंदाज़-ऐ-एतराज — डी के निवातिया

अंदाज़-ऐ-एतराज *** क्यों आज फिर मौसम का मिजाज बदला है क्या सनम ने आशिक़ी का अंदाज बदला है ! दिल तो पहले ही डूबा है, अश्क-ऐ-समंदर में फिर क्यों …

हुस्न और इश्क़ — डी के निवातिया

हुस्न और इश्क़ हुस्न और इश्क़ पर किस्से आम लिख दिये कविता ग़ज़ल,नज़्म,शेर,तमाम लिख दिये कोई वीरानी कहे कोई कहे खुदा की इबादत, हमने तो ख़ुशी-गम सब तेरे नाम …

चिराग-ऐ-मुहब्बत — डी के निवातिया

चिराग-ऐ-मुहब्बत *** तेरी तूफ़ान-ऐ-नफरत भला उसे क्या बर्बाद करे    चिराग-ऐ-मुहब्बत जिसने आँधियो में जलाये हो !! ! ! ! —-:: डी के निवातिया  ::—

घोंसला वो बदनाम — डी के निवातिया

घोंसला वो बदनाम   परिदो से भी बदतर आज का इंसान हो गया ! पाए थे जहा पंख घोंसला वो बदनाम हो गया !! रूह तरसती रही, जिस्म मालमाल …

ज़ालिम — डी के निवातिया

ज़ालिम —@@@— बाँट दिया धर्म के नाम पर दुनिया को, अरे इंसानी फ़रिश्ते तेरी जात क्या है ! मै तो निर्मल जर्रा हूँ माटी-ऐ-हिन्द का तू बता ज़ालिम तेरी …

तेरा जो साथ मिलता – शिशिर मधुकर

तेरा चेहरा जो दिख जाता वहीँ बरसात हो जाती बिना बोले ही नज़रो से दिलों की बात हो जाती अगर तुम चाँद के जैसा खुद का श्रृंगार कर लेते …

लग गया है…………. रोग सजना |गीत| “मनोज कुमार”

लग गया है प्यार का ये रोग सजना जाता नही कैसा है ये रोग सजना लाइलाज बीमारी है तड़पूँ सजना लग गया है तुमसे ये दिल सजना लग गया …

कसूर इस दिल का है सारा – शिशिर मधुकर

क्या करूँ अपनी हालत का कसूर इस दिल का है सारा मुझे कैदी बनाने का हुनर तो तिल का है सारा मैं तो नदिया का पानी हूँ मचलना मेरी …

ज्ञान का सागर अथाह मिलेगा — डी. के. निवातिया

ज्ञान का सागर अथाह मिलेगा  *** झिझक को अपनी तोड़ो तुम क्षमता को नया उत्साह मिलेगा ! ह्रदय चक्षुओं को खोलोगे तो, ज्ञान का सागर अथाह मिलेगा !! विद्वान …

अदा — डी के निवातिया

अदा +++++++++++++++ मुझसे मुहब्बत भी बेपनाह करता है फिर भी मेरी हर बात पर बिगड़ता है इसे अदा कहुँ या फितरत जनाब की जो भी हो दिल ये तो …

असल पैगाम – शिशिर मधुकर

जिन आँखों में मुहब्बत का नशीला जाम मिलता है उन्हीं सीनों से लगने में ही तो आराम मिलता है जुबां का क्या करोगे झूठ वो तो कह ही सकती …

साथ — डी के निवातिया

साथ जो हमेशा मेरे साथ था, वो कभी मुझसे मिला नहीं कम से कम साथ तो था, इसलिये कोई गिला नहीं पर साथ वालो से भी कोई दौलत तो …

भेद सारे ख़त्म हुए – शिशिर मधुकर

मुहब्बतें तुमसे मेरी जान कम नहीं होंगी चाहे साँसें मेरी ये धीमे से थम रही होंगी बदलती ऋतु में सबका मिजाज बदलेगा बहती नदियां भी पर्वतों में जम रही …

सबसे न्यारा — डी के निवातिया

सबसे न्यारा जुर्म की दुनिया में सबसे न्यारा है क्योकि सच्चाई का वो हत्यारा है हर रोज़ मुखातिब होता है मुझसे मेरा दुश्मन भी कितना प्यारा है !! !!! …