Tag: शेरो शायरी

बात क्या करें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना हो जब बीच में तो फिर बात क्या करें तड़पे ना जो मिलन को उससे मुलाक़ात क्या करें दिन ही जब इस शहर में मुश्किलों से गुज़रता …

मशगूल — डी के निवातिया

 मशगूल *** हंसगुल्लों  में मशगूल है जिंदगानी मतलब की बातो के लिये वक़्त किसके पास ! जब अपने ही नकार देते है अपनों को टुटा हुआ नर्वस दिल फिर …

चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए — डी के निवातिया

चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए *** कुछ हो न हो चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए घर से संसद तक बहस जमकर होनी चाहिए !! सियासत के गलियारों की भी …

हमने भुला दिया – शिशिर मधुकर

देखी जो तेरी बेरुखी हमने भुला दिया अपने हर अरमान को नीदें सुला दिया मुद्दतें गुज़री थी नमी आँखों से दूर थी तेरी जफ़ा ने फिर से उनको रुला …

इख्तियार नहीं है – शिशिर मधुकर

जब तुमको ही अब मेरा इंतज़ार नहीं है मेरा दिल भी परेशान हो बेकरार नहीं है बेडियां जब प्यार की टूटा करी हैं आज कोई किसी के हाथों में …

दावत — डी के निवातिया

दावत *** मुबारक हो आपको बकरीद की दावत आई है ऊँट,गाय,भैस, बकरो की फिर सामत आई है हजरत इब्राहिम के हालात क्या थे कौन जाने जीवो पर दया के …

तीर निज दिल पे झेले हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत के मैंने जीवन में जो भी खेल खेले हैं हार हिस्से में आई है और अब फिर से अकेले हैं दर्द सहने की शक्ति जब किसी की बढ़ती …

एक ख्याल — डी के निवातिया

एक ख्याल ***@*** अक्सर मेरे घर आने से कतराने लगे है मेरे अपने चाहने वाले लोग   क्योकि झुकना उनकी शान के खिलाफ है इधर मेरे घर की चौखट …

जहाँ पर बस उजाला है – शिशिर मधुकर

तूने जब से मुझको अपनी दुनिया से निकाला है इक ग़म ही फ़कत चोटिल हो सीने ने संभाला है तबस्सुम छोड़ के ऐ फूल देख तुझको क्या मिला ख़ुशबुएं …

लफ्ज़ मेरे — डी के निवातिया

लफ्ज़ मेरे *** लफ्ज़ मेरे एक रोज़ ज़माना बोल रहा होगा रफ्ता रफ्ता सबके वो राज़ खोल रहा होगा !! ज्यों ज्यों पढ़े जायेंगे पन्ने उलझी डायरी के ना …

जहाँ छाया मिली – शिशिर मधुकर

राहे मुहब्बत में कभी तो नाम कर लिया बना के दूरियां तुमने खुद को फिर आम कर लिया कभी होठों से लग के जो मेरी नस नस में पहुंचा …

प्रेम तो किस्मत से मिलता है-शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिन को होती है कभी रूठा नहीं करते फक़त दुनिया की मर्ज़ी से हाथ छूटा नहीं करते आईना धुंधला हो जाए छवि दिखला ही देता है बिना पत्थर …

इंतज़ाम करो — D. K Nivatiya

इंतज़ाम करो *** विकास का दम भरते हो, कुछ जनता के भी काम करो निश दिन रेल होती डी-रेल,  इसका भी इंतज़ाम करो कितनी जिंदगियां बे-मौत चढ़ जाती है …

मरने दो — डी के निवातिया

मरने दो *** *** *** रेल पटरी से जनता की उतरी है, उतरने दो। हादसे होते है तो लोग भी मरते है, मरने दो। हम देश चलाते है हवाई …

धुंधली ना हो तस्वीर-शिशिर मधुकर

धुंधली ना हो तस्वीर तू रंग इसके उभार दे नज़रों के पास आ ज़रा किस्मत संवार दे सूखी हैं सभी डालियाँ बरसी है ऐसी आग सावन की फुहारों को …

मिलकर तो देख — डी के निवातिया

मिलकर तो देख ** तू एक बार मुस्कुरा के मिलकर तो देख ये तन मन तुझ पे न वार दूँ तो कहना !! ! नयनो में नयना कभी डालकर …

नैन पर फिर भी मिल गए – शिशिर मधुकर

छुपाया बहुत खुद को नैन पर फिर भी मिल गए असर ऐसा हुआ दिल पे फूल खुशियों के खिल गए खौफ ने इस कदर घोला है ज़हर फ़िज़ा में …

प्रेम धागे का बंधन – शिशिर मधुकर

तेरे बिन दिन नहीं कटते तुझे कैसे बताएं हम तू ही जब पास ना आए तुझे कैसे सताएं हम तेरा वो रूठ जाना और मनाना याद आता है समझ …

गुजर गया अब के ये सावन -शिशिर मधुकर

गुजर गया अब के ये सावन बिना कोई बरसात हुए सब शिकवे हमने कह डाले बिन तेरी मेरी बात हुए प्यार लुटा के बैरी होना सबके बस की बात …

वो लम्हें निकल गए – शिशिर मधुकर

जिनमें सुकूं मिला मुझे वो लम्हें निकल गए सपनों के सभी आशियां धू धू हो जल गए चट्टान सा मिला ना मुझे रिश्ता कोई यहाँ मौसम गर्म हुआ तो …

किस्मत के उलट फेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में हो जिनके वो ही तो मान करते है मिटा के जिस्मों की दूरी उनको एक जान करते हैं उम्मीदें मैंने पाली थी नाज़ बन माथे पे …