Tag: शेरो शायरी

वर्षा भादों की – शिशिर मधुकर

घुमड़ घुमड़ के आती हैं घटाएँ तेरी यादों की गिरा जाती हैं जो बिजली सारे टूटे वादों की मैं जन्मों से प्यासा हूँ नहीं ये प्यास बुझती है कोई …

सर झुका लिया – शिशिर मधुकर

संयम का नया सोपान देखो हमने पा लिया तुम सामने खड़े थे फिर भी मुँह घुमा लिया कच्ची नहीँ है प्रीत जो बारिशों में टूट जाएगी यादों में जल …

ज़माना कहता है – शिशिर मधुकर

तुम्हे देखा है सुबह शाम ज़माना कहता है तेरी खातिर हुआ बदनाम ज़माना कहता है बड़ा काबिल था मैं एक दिन सबकी निगाहों में मगर मुझको नहीं अब काम …

कैसे भुला दें हम – शिशिर मधुकर

दिल तुम से लग गया है कैसे भुला दें हम अरमान जो जग गए है कैसे सुला दें हम लाखों जतन किए हैं यहाँ तुमको हँसाने में कैसे खुद …

उनको मनाइये – शिशिर मधुकर

रूठे हुए जनाब हैं उनको मनाइये टूटे हुए से ख्वाब हैं उनको मनाइये ऐसी ना कोई बात है इतने खफा हैं वो आँखों में आफताब है उनको मनाइये सज …

शिकवे किसे कहूँ – शिशिर मधुकर

मुझको तुम्हारे प्यार ने फिर से जिला दिया तेरा करम हुआ मुझे अमृत पिला दिया उजड़े थे मुहब्बत की राहों में जब चले किस्मत ने मुझे तुमसे लेकिन मिला …

रांझे की हीर — डी. के. निवातिया

रांझे की हीर कल तक करते देखा था मुहब्बत कि खिलाफत जिनको। आज शिद्दत से करते पाया एक रांझे कि वकालत उनको । ऐसा क्या हुआ, फिजा-ऐ-मिजाज़ ही बदल …

मिलन का खेल – शिशिर मधुकर

किसी के साथ में रहते ये ज़माने गुजर गए किसी की धड़कनो में हम पल में उतर गए बड़े अरमानों के संग जिंदगी सौंपी थी हमने आशियाँ सपनो के …

समय आजमाता है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत क्या हुई तुमसे भूल बैठे जहाँ को हम तुम्हारे बिन तुम ही कह दो जाएं कहाँ को हम जुड़े हैं तुमसे कुछ ऐसे सारे तार इस दिल के …

चाह – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

चाह दिल की ये चाह थी के बहुत प्यार करेंगे हम अपनी चाहत से ………………….. पर जिसको चाहा हमनें उसकी चाहत कोई ओर था …………………….. शायर : सर्वजीत सिंह …

shayariya-1

1)किसी अधूरी मुलाकात की बिखरी-बिखरी बात हो तुम, शायद बादलों से छनकर आती धूप सी सौगात हो तुम। 2)कहाँ अंधेरों में भटक रहा है कब से, वो अक्स है …

नफ़रत का अँधेरा – शिशिर मधुकर

जीवन में ये मुकाम जाने कैसा आ गया नफ़रत का अँधेरा मेरे हर ओर छा गया जिससे भी मैंने यहाँ फूलों की आस की हर आदमी मुझको एक नश्तर …

दामन – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

दामन किस्मत ने साथ दिया होता अगर तो हम भी मोहब्बत कर ही लेते ………………. पर बदनसीबी ने पकड़ा है दामन ऐसा के अब किसी से क्या गिला करें …

खुदा जितना सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम इतना संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से प्यार कितना करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

वक़्त का दौर — डी. के. निवातिया

वक़्त का दौर   लोग पूछते है हाल कैसे है जनाब के अब कैसे बताये किस तरह गुजर रही है जिंदगी ! वक़्त के उस दौर से गुजरा हूँ …

सेहरा — शेरो शायरी — डी के निवातिया

लो सज गए वो फिर से पहनकर सेहरा भी, अरे कोई तो जाकर उन्हें हमारी याद दिलाये ! हम ख़ाक में मिल गए उनके एक इशारे पर और वो …

यादो का रंग — डी. के. निवातिया

भीगे तन पे जलन का अहसास दे गया मौसम भी फाग का बड़ा बेईमान निकला ! ! रंग होली का भी न चढ़ने दिया इस बार तेरी यादो का …

मुक़ाम ए बन्दगी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत की झलक देखी पर ना देखी है दीवानगी तूफ़ान में वो डगमगा गए उनसे उम्मीदें जब जगीं उनकी तस्वीर दिल दिमाग में कुछ ऐसी बस गई लाख चाहा …

किस्मत का सितम – शिशिर मधुकर

मुझे इस वक्त ने तन्हाई का जो मंज़र दिखाया है कोई राज़ यूँ लगता है इसके दिल में समाया है सोच कर खान हीरों की मैंने दोनों मुट्ठी भरी …

ज़िन्दगानी गुजरती है – शिशिर मधुकर

हुई ना प्रेम की बारिश मेरा मन आँगन सूखा है मिलन की आस संजोए हरदम रहता ये भूखा है दीवारें देख कर मैंने मकां एक घर समझ डाला इसके …