Tag: शेरो शायरी

शातिर – डी के निवातिया

शातिर *** वो देखो, वो जो भोला सा शख्श है ये मत पूछो वो कितना शातिर है, बात न पूछो उसकी हद-ऐ-शराफत की गरीबी का बाज़ार सजाना जानता है …

तुम्हारी अदा – डी के निवातिया

तुम्हारी अदा *** इतना प्यार करते हो, कभी न जताते हो तुम यदा कदा ही सही मगर, बहुत सताते हो तुम कैसे न जां निशार करे हम तुम्हारी अदाओ …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

ज़लवा – डी के निवातिया

ज़लवा *** जरुरी नहीं दुनियाँ में सिर्फ हुस्न का ज़लवा हो हमने तो कीचड़ के हिस्से में कमल को देखा है अभद्र हो या दीन-दरिद्र कद्र हर शै: की …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …

कैसे कह दूँ – डी के निवातिया

कैसे कह दूँ *** *** *** कैसे कह दूँ उसको मै बेवफा, नब्ज चलती है हर पल मेरी उसके नाम पर ! कभी मुलाकात नही हुई तो क्या, मेरे …

कोई बंधन नहीं टूटा – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी रिश्ता मगर मैं तोड़ ना पाया तुम्हें घुट कर तड़पने को अकेला छोड़ ना पाया हवाएं कुछ चली ऐसीं तिनका तिनका बिखेरा है घरोँदा उड़ गया …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

कहानी छोड़ जायेंगे – डी के निवातिया

कहानी छोड़ जायेंगे *** *** *** मिटाओगे कहाँ तक मेरी यादें, हर मोड़ पर लफ्जों की वीरानी छोड़ जायेंगे l कैसे बीतेगी तुम्हारी सुबह-शाम, हम सिसकती रातों की कहानी …

गैर हम हो नहीं सकते – शिशिर मधुकर

कोई परदा नहीं जब बीच गैर हम हो नहीं सकते किसी और की बाहों में अब तुम सो नहीं सकते बड़ी मुश्किल से मिलती हैं दौलतें प्रेम की जग …

भाग्य ना कोई बांच सका है – शिशिर मधुकर

वक्त की ज़द में कुछ भी हो तुम फिर भी रहना पड़ता है तेरे बिन इस तन्हाई का ग़म मुझको भी सहना पड़ता है कितना भी कोई संयम रख …

कौन ढलना चाहे – डी के निवातिया

कौन ढलना चाहे ********** है भला कौन मुसाफिर राह में जो संग चलना चाहे हर कोई चाहे नया रंग , मेरे रंग कौन ढलना चाहे !! हर किसी को …

जो मन आपस में मिल जाएँ – शिशिर मधुकर

जो मन आपस में मिल जाएँ जुदा वो हो नहीं पाते जो मिल के भी नहीं मिलते वो तन्हा सो नहीं पाते अनोखा सा जो रिश्ता है दर्द ए …

तेरी मुस्कान का जादू – शिशिर मधुकर

समां वो याद है मुझको जो तुम आँखों में भरते थे बड़े नज़दीक आ कर के अपनों सी बात करते थे मुहब्बत किस से हो जाए नहीं कोई नियम …

मुकद्दर से सदा हारा – शिशिर मधुकर

मिलन की आग अब जलती नहीं है तेरे सीने में मुझे भी अब नहीं इच्छा लबों का जाम पीने में ज़माने ने मेरा पत्थर के माफिक रूप देखा है …

थक गया हूँ – शिशिर मधुकर

थक गया हूँ अब मैं तेरे इंतज़ार में वीरानी सी छा गई है मेरे दयार में नाराज़ होके मैंने जो भी तुझे कहा जुबान अब नही है मेरे इख्तियार …

किसी को फर्क क्या – शिशिर मधुकर

मुहब्बत इंसान की इंसान से जब टूट जाती है लाख कोशिश करो ये कभी वापस न आती है तूने घायल किया मैंने तेरे से प्यार जब माँगा मेरे दिल …

बड़ा गहरा समुन्दर है – शिशिर मधुकर

तुम्हें तो पा लिया मैंने अब तो बस चैन पाना है किसी भी हाल मे ये साथ तो हरदम निभाना है बड़ी जालिम है ये दुनिया ढूंढ़ती रहती है …

देख के तेरी सूरत – शिशिर मधुकर

मेरे जीवन में जब जब भी घोर निराशा छाती है देख के तेरी सूरत फिर जीने की इच्छा आती है बिंधा हुआ है दिल ये मेरा दुनिया भर के …

कोई पूछे खुदा से आज – शिशिर मधुकर

तुमने मुझ को सताया है चलो आपस में अब बोलें छुपे हैं दिल के भीतर जो राज़ जल्दी से सब खोलें ज़माने ने करीं साजिश तन्हा हो कर रहें …

मुकरनें से तुम्हारे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत हो गई तुमसे मुझे अफसोस होता है तुम्हारी बेरुखी से तन्हाइयों में दिल ये रोता है कोई सपनों में आ के गर तुम्हें हरदम सताता है चैन की …

तुम जान जाओगे – शिशिर मधुकर

ज़रा शीशे में खुद को देख लो तुम जान जाओगे परख मेरी दो नज़रों की भी तुम पहचान जाओगे तुम्हीं सबसे हसीं हो इस जहां में कह दिया मैंने …