Tag: शेर

तेरी बन्दिगी – शिशिर “मधुकर”

काश आ जाते तुम चुपके से मेरी-इस जिंदगी में हम भी लगा लेते ये मन फिर तो तेरी बन्दिगी में . तब हर तरफ फैली उदासी और गिले-शिकवे ना …

लाली का राज

लोग पूछते है हमारी आँखे कि लाली का राज अब उन्हें कैसे बताये इन सुर्ख नैनों का हाल ! पीकर नफरतो के भरे जाम जिंदगी में हमने जिया इस …

गुजरा जमाना

याद आता आज वो गुजरा जमाना नजरो के पैमाने से पीना पिलाना ! करके गुस्ताखियाँ नजर का चुराना जागे जागे सोना नींद में मुस्कुराना !!

रेत है खाली

समंदर पे चमकती धूप, किनारे रेत है खाली! हसीं मंज़र नहीं दिखते, अगरचे पेट है खाली! तू क्यों रूठ कर बैठा है दुनिया देखने वाले! कहीं है बाढ़ का …

मलाल-ए-दिल

दिल है मेरा क़ायल इश्क का क़ीमत इसकी बताइये, हाल है मेरा बेहाल ख़ुश्क सा आफ़त इसकी बताइये । जिस्म मेरा घायल अश्क़ का उक़ूबत इसकी बताइये, जख्म मेरा …

।।शेर।। दिल नही बचता।।

न जाने क्यों लोग दरियादिली की बात करते है । न दरिया ही बचता है न दिल ही बचता है ।। जिस दिन हिसाब होगा तेरे गुनाहो का देख …

मुठभेड़ (शेर)

सरे राह चलते यकायक जो उनसे भेट हुई नयनो के चले बाण,दिल की धड़कन तेज़ हुई कर के गुस्ताखी वो चल दिए नजरे चुराकर ऐसे लगा जैसे भेंट नहीं, …

काबे जाकर भी

1- काबे जाकर भी क्या करोगे ‘मुकेश जी’आखिर? फ़जल से खुदा के है जन्नत दो आँखों के नसीब। 2- मुद्दआ बहुत हैं बाइसे-ताखीर में लेकिन, तुम्हें क्या चाहिए जिन्दगी …

कुछ अलग-अलग विषय पर शेरो-शायरी हो जाए…

हिम्मत कर आज तो पार कर ही लूँगा मैं इस बल खाती नदी को आखिर कब तक करता रहूँ इंतज़ार लहरों के शान्त होने का ____________________________________ दिल-विल,प्यार-व्यार, बातें सुन …

जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो

जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो जब आँख बंद हो तो यादे हिन्दुस्तान की हो मै मर भी जाऊ तो कोई गम नही, लेकिन मरते वक्त मिट्टी …

यदि देश हित मरना पड़े मुझ को सहस्त्रों बार भी

यदि देश हित मरना पड़े मुझ को सहस्त्रों बार भी ।तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाउं कभी ।। हे ईष भारतवर्ष में शत बार …

इन्द्रधनुष के रंग सजाने तो दो

तुफानों से आँख मिलाने तो दो I गमे दरिया पार हो जाने तो दो I फिर करेंगे बयां हकीकत तुम्हे, पहले कोई कहानी बनाने तो दो II संभलने को …

छोड़ दिया हमने

गीत जो थे दिल के बेहद करीब, अब उन्हें गुनगुनाना छोड़ दिया हमने I महफिलों में जाकर घुलना -मिलना, हंसना -हंसाना छोड़ दिया हमने II जिनके रुठते ही सांस …

तो जिंदगानी किसी काम की नहीं

कल्पना में चाहे जितनी हो उंचाई, पर अफ़साने में न हो ज़रा भी गहराई, तो कहानी किसी काम की नहीं I तोहफे जितने मिले हों मोहब्बत में, पर काम …